चीन ने हमारी और ज़मीन पर कब्जा कर लिया। यह बात पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) शिवशंकर मेनन ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ खास बातचीत में कही है। चीन की हरकतों के जवाब में भारत की प्रतिक्रिया को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में मेनन ने कहा यह इस बात पर निर्भर है कि आप का उद्देश्य क्या है? उन्होंने याद दिलाया कि 2017 में डोकलाम में हम जमीन के एक टुकड़े के लिए 72 दिन तक चीन से भिड़े रहे। जमीन के इस टुकड़े को चीन अपना मानता है और हम मानते हैं कि यह जमीन भूटान की है। 72 दिन बाद बातचीत हुई और उसके बाद दोनों देश उस जगह से हटकर पीछे चले गए। अब देखिए, हम इसके तुरंत बाद अपनी जीत का ऐलान करने में जुट गए। फिर, जवाब में चीन ने क्या किया? उनकी फौज वापस लौट कर पठार के बाकी हिस्से पर भी काबिज़ हो गई!
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चीन पश्चिमी सेक्टर के कुछ स्थानों में एलएसी पर यथास्थिति बदल रहा है और हम उससे मोर्चेबंदी खत्म करने पर बात कर रहे हैं न कि यथास्थिति की बहाली के लिए। यह कहने की प्रवृत्ति भी रही है कि कुछ हुआ ही नहीं। अरे, जब कुछ हुआ ही नहीं तो वार्ता काहे के लिए कर रहे हो! चीन भी कह सकता है कि कुछ नहीं हुआ तो हमसे पीछे जाने के लिए क्यों कह रहे हो? मेरी सलाह है कि अपने देशवासियों से ईमानदारी के साथ शुरू से ही सच बोलो।…हमें अपनी बनाई कहानी की नहीं, जमीन पर अपनी पोज़ीशन की रक्षा करनी चाहिए।

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