कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का दावा है कि वे लोगों को नोटबंदी की हकीकत बताने के लिए शहर-शहर घूमेंगे। नोटबंदी के नाम पर देश में जो सबसे बड़ा घोटाला हुआ है, केवल उसकी बातें ही लोगों के सामने नहीं रखेंगे, बल्कि उन्हें वीडियो दिखाकर समझाएंगे कि यह आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला है। नोटबंदी और मोदी सरकार की पोल खोलने का यह अभियान दो-तीन दिन में शुरू होगा। सबसे पहले गुजरात और उसके बाद महाराष्ट्र में जाएंगे। इसके बाद यूपी के लोगों को नोटबंदी घोटाले के वीडियो दिखाए जाएंगे।
कपिल सिब्बल का कहना है कि नोटबंदी के नाम पर एक राजनीतिक पार्टी, उसके नेताओं और अफसरों ने घोटाला किया है। जिस वक्त देश का आम नागरिक अपने पैसे के लिए बैंकों के बाहर लाइन लगाए खड़ा था, उस दौरान सत्ताधारी पार्टी के लोग काले धन को सफेद बनाने में लगे थे। चूंकि अब हमारे पास नोटबंदी घोटाले से जुड़े अनेक साक्ष्य बतौर वीडियो के रूप में हमारे सामने आ रहे हैं, इसलिए हम उन्हें जनता के सामने रखेंगे। इस वीडियो में सत्ताधारी पार्टी के बड़े लोगों का नाम साफतौर पर लिया जा रहा है।
सिब्बल ने कहा, मैंने मार्च में और उसके बाद नौ अप्रैल को भी ऐसे वीडियो दिखाए थे। इनमें साफ दिख रहा है कि कैबिनेट सचिवालय की एक खुफिया विंग का कर्मचारी नोट बदलवाने के खेल में शामिल है। कपिल सिब्बल ने उस कर्मचारी का नाम राहुल रथरेकर, फील्ड असिस्टेंट, बताया है।
उन्होंने कहा, वीडियो में उस कर्मचारी की कथित संलिप्तता का संकेत मिलता है। उसका पहचान पत्र भी दिख रहा है। इस घोटाले में उक्त कर्मचारी की संलिप्तता कैबिनेट सचिवालय ने भी मानी है। पुरानी मुद्रा के नोटों की अदला-बदली में उनकी संदेहास्पद भूमिका के चलते उन्हें जून, 2017 में (5 साल की सेवा के बाद) बर्खास्त कर दिया गया था।
हैरानी की बात है कि नोटबंदी घोटाले के इतने सबूत होते हुए भी न तो सरकार ने और न ही जांच एजेंसियों ने इस केस की पड़ताल करने की कोशिश की। यही वजह है कि अब कांग्रेस पार्टी इस घोटाले के वीडियो को जनता के सामने रखेगी। सोशल मीडिया पर भी ये वीडियो डाले जा रहे हैं।
कपिल सिब्बल ने सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं, जैसे राहुल को बर्खास्त करने से पहले उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, नहीं। राहुल रथरेकर की गतिविधियों की पूरी तरह से जांच क्यों नहीं की गई, इस मामले में कोई एफआईआर हुई है या नहीं। सिब्बल ने कहा, जब यह सब हुआ तो चौकीदार सो क्यों रहा था।
इस मामले में जांच का न होना ये दर्शाता है की इस लूट में शामिल लोगों की सुरक्षा की जा रही है। जिन लोगों ने भ्रष्टाचार से हाथ मिलाया है, वे ईमानदार होने का दिखावा नहीं कर सकते।