युवाओं को वैश्विक अवसर से जोड़ने की झारखण्ड की पहल

झारखण्ड सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने लंदन प्रवास के दौरान गुरुवार को शिक्षा एवं कौशल विकास पर केंद्रित एक उच्चस्तरीय राउंड टेबल का आयोजन किया, जिसमें यूके की अग्रणी विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, स्किलिंग संगठनों, अवार्डिंग बॉडीज़ और अप्रेंटिसशिप नेटवर्क से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ने और कौशल आधारित शिक्षा को उद्योगोन्मुख बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

सत्र की सह-अध्यक्षता पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार और झारखण्ड सरकार की अपर मुख्य सचिव वंदना डाडेल ने की। उनके अनुसार यह पहल शिक्षा को रोजगार, कौशल को अवसर और स्थानीय प्रतिभा को वैश्विक मंच से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पूर्वी भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का रास्ता खोलने की पहल

प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक निवेशों का केंद्र अब तक प्रमुख रूप से पश्चिम, दक्षिण और दिल्ली-एनसीआर तक सीमित रहा है, जबकि पूर्वी और मध्य भारत अभी भी वैश्विक शिक्षा निवेश के मानचित्र से बाहर हैं। झारखण्ड ने पूर्वी भारत को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा साझेदारियों के अगले प्रमुख गंतव्य के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।

उच्च शिक्षा सुधार के तीन प्रमुख बिंदु

बैठक में झारखण्ड ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए तीन सुधार प्राथमिकताएँ प्रस्तुत कीं —
(1) राज्य संकाय विकास अकादमी,
(2) राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप अनिवार्य 8-सप्ताह इंटर्नशिप, और
(3) राष्ट्रीय बेंचमार्किंग मॉडल पर राज्य स्तर की संस्थागत रैंकिंग व्यवस्था।

राज्य ने यह भी बताया कि विदेशी छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत यूके जाने वाले छात्रों में 65 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो उच्च शिक्षा में बढ़ती लैंगिक भागीदारी को दर्शाता है।

स्किलिंग और अप्रेंटिसशिप आधारित शिक्षा पर जोर

संवाद में अप्रेंटिसशिप-आधारित शिक्षा, उद्योग-सम्बद्ध डिग्री कार्यक्रम, फिनिशिंग स्कूल, आईटीआई पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण और कौशल आधारित अनुसंधान पर जोर दिया गया। केयर इकॉनमी, हॉस्पिटैलिटी, ग्रीन स्किल्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और खनन प्रमुख फोकस सेक्टर रहे।

भारत–यूके सहयोग के नए अवसर

राउंड टेबल में कौशल योग्यता की पारस्परिक मान्यता, संयुक्त डिग्री, अंतरराष्ट्रीय कैंपस, छात्र–शिक्षक विनिमय, और भारत–यूके ग्रीन स्किल्स एजेंडा पर सहयोग बढ़ाने के प्रस्तावों पर सहमति बनी। सतत पर्यटन, आदिवासी ज्ञान, संस्कृति और जलवायु कार्रवाई को भी संभावित सहयोग क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया।

यूके पक्ष की सकारात्मक प्रतिक्रिया

यूके प्रतिनिधियों ने झारखण्ड के दृष्टिकोण की सराहना करते हुए ट्रांसनेशनल एजुकेशन, पाठ्यक्रम विकास, शिक्षक प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा में साझेदारी करने की रुचि व्यक्त की। लंदन में आयोजित संवाद का समापन दोनों पक्षों द्वारा संस्थागत स्तर पर आगे की बातचीत व साझेदारी को बढ़ाने के निर्णय के साथ हुआ।

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