डावोस/रांची:
विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में झारखंड सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने इस वर्ष राज्य के निवेश अवसरों, खनिज क्षमता, हरित ऊर्जा, शिक्षा और कौशल विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण गतिविधियों में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड को उभरती हुई औद्योगिक और मानव पूंजी आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में वैश्विक मंच पर पेश किया।
वैश्विक मंच पर झारखंड की प्रस्तुति
डावोस में संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा वाला राज्य नहीं, बल्कि हरित ऊर्जा, सतत पर्यटन और कुशल मानव संसाधन के माध्यम से आर्थिक परिवर्तन की नई कहानी लिख रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में प्राकृतिक संसाधन, ऊर्जा अवसंरचना, वन संपदा, औद्योगिक परंपरा और युवा जनसंख्या का अद्वितीय संयोजन मौजूद है, जो निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है।
उच्च-स्तरीय बैठकें और निवेश वार्ताएं
डावोस के दौरान झारखंड प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न देशों के निवेशकों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और नीति मंचों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकों में भाग लिया। इन बैठकों में विशेष रूप से निम्न विषयों पर चर्चा हुई—
• हरित ऊर्जा एवं ऊर्जा ट्रांजिशन
• इलेक्ट्रिक मोबिलिटी
• खनिज मूल्य श्रृंखला एवं प्रोसेसिंग
• कौशल आधारित मानव पूंजी
• पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था
• स्मार्ट सिटी एवं डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने रांची और आसपास के क्षेत्रों में भविष्य निवेश की संभावनाओं में रुचि दिखाई।
शिक्षा एवं कौशल विकास पर रणनीतिक संवाद
डावोस और लंदन चरण के दौरान झारखंड सरकार ने अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों एवं स्किलिंग संस्थानों के साथ उच्च-स्तरीय संवाद आयोजित किया। इस दौरान संयुक्त रूप से कौशल एवं शिक्षा सहयोग के नए मॉडल विकसित करने पर सहमति बनी। प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे—
✔ अप्रेंटिसशिप आधारित प्रशिक्षण
✔ संयुक्त डिग्री कार्यक्रम
✔ सैटेलाइट कैंपस और ट्रांसनेशनल एजुकेशन
✔ शिक्षक एवं छात्र आदान–प्रदान
✔ हरित कौशल और नई अर्थव्यवस्था
राज्य प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी भारत को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा निवेश का अगला केंद्र बनाने पर जोर दिया।
खनिज एवं ग्रीन इकोनॉमी पर विशेष फोकस
प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के खनिज भंडार और ऊर्जा संक्रमण में इसकी भूमिका को उजागर किया। राज्य ने बताया कि झारखंड भारत की क्रिटिकल मिनरल रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और विनिर्माण, बैटरी तकनीक, ई-मोबिलिटी एवं एडवांस मैटेरियल्स में योगदान कर सकता है।
टूरिज्म और सांस्कृतिक पहचान
डावोस में सतत पर्यटन, आदिवासी संस्कृति और प्रकृति आधारित आर्थिक गतिविधियों को नए आर्थिक अवसरों के रूप में प्रस्तुत किया गया। वैश्विक मंचों ने झारखंड के हेरिटेज और सांस्कृतिक परिसंपत्तियों को लेकर रुचि व्यक्त की।
वैश्विक साझेदारियों का रास्ता खुला
बैठकों के दौरान कई संस्थानों और कंपनियों ने राज्य सरकार के साथ आगे साझेदारी बढ़ाने में रुचि दिखाई। निवेश, शिक्षा, कौशल और ग्रीन एजेंडा में समझौतों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
प्रतिनिधिमंडल का निष्कर्ष
डावोस यात्रा के परिणामस्वरूप झारखंड ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कूटनीति के क्षेत्र में एक नई दिशा स्थापित की। राज्य ने सार्वजनिक रूप से यह संदेश दिया कि वह निवेश, कौशल और हरित विकास के क्षेत्रों में एक सक्षम और विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहा है।



