महाराष्ट्र में सामने आया नासिक ‘गॉडमैन’ कांड अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे-सीधे Devendra Fadnavis सरकार की कार्यशैली और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मुख्यमंत्री भले ही विधानसभा में यह दावा कर रहे हों कि आरोपी Ashok Kharat को समय रहते गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन हकीकत यह है कि यह कथित ‘गॉडमैन’ सालों तक खुलेआम महिलाओं का शोषण करता रहा और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी—या फिर अनदेखी की गई।
सरकार का कहना है कि खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई हुई और आरोपी को देश छोड़ने से पहले पकड़ लिया गया। लेकिन सवाल यह है कि अगर पुलिस और खुफिया तंत्र इतना ही सक्रिय था, तो इतने लंबे समय तक यह सिलसिला चलता कैसे रहा?
एक 35 वर्षीय महिला की शिकायत के बाद 18 मार्च को गिरफ्तारी हुई। पीड़िता के अनुसार, उसे धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर बुलाकर नशीला पदार्थ दिया गया और फिर लगातार शोषण किया गया। यह आरोप अपने आप में दिखाता है कि किस तरह अंधविश्वास और सत्ता की ढिलाई ने अपराधी को खुली छूट दे रखी थी।
इस मामले का खुलासा भी किसी सरकारी तंत्र ने नहीं, बल्कि आरोपी के ही एक पूर्व कर्मचारी ने किया, जिसने कथित तौर पर गुप्त कैमरे लगाकर सबूत जुटाए। इससे यह साफ होता है कि सिस्टम तब जागा, जब मामला हाथ से निकल चुका था।
जांच या नुकसान के बाद की औपचारिकता?
पुलिस का कहना है कि 10 मार्च को पहली शिकायत के बाद जांच शुरू हुई, लेकिन अब लगातार नई पीड़िताएं सामने आ रही हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह मामला कितना व्यापक और पुराना है।
आरोपी के फार्महाउस, बंगले और कार्यालय पर छापे मारे गए हैं और CCTV फुटेज जब्त किए गए हैं। लेकिन यह कार्रवाई अब हो रही है, जब नुकसान पहले ही हो चुका है।
राजनीतिक विवाद और सरकार की घेराबंदी
मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है और विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है।
शिवसेना (UBT) के नेता Bhaskar Jadhav ने इस मामले में उच्च अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। वहीं विपक्ष के नेता Vijay Wadettiwar ने इसे महाराष्ट्र के लिए कलंक बताते हुए आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
इतना ही नहीं, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष Rupali Chakankar को भी इस्तीफा देना पड़ा, जिससे यह मामला और अधिक संदिग्ध हो गया है।
चौंकाने वाले सबूत
जांच में अब तक 100 से ज्यादा वीडियो क्लिप मिलने की बात सामने आई है। आरोप है कि इनका इस्तेमाल पीड़ित महिलाओं को डराने और दबाव में रखने के लिए किया जाता था।
महिलाओं का कहना है कि आरोपी धार्मिक शक्तियों और अनुष्ठानों के नाम पर उन्हें अपने नियंत्रण में लेता था। कई मामलों में उन्हें अकेले कमरे में बुलाया जाता था, जबकि उनके परिजनों को बाहर रोक दिया जाता था।
अंधविश्वास का जाल, प्रशासन की चुप्पी
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने डर और अंधविश्वास का ऐसा माहौल बना रखा था, जिसमें लोग आसानी से फंस जाते थे।
वह साधारण चीजों को ‘चमत्कारी’ बताकर महंगे दामों में बेचता था और लोगों की आर्थिक स्थिति के अनुसार उनसे पैसे वसूलता था। सवाल यह है कि इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस खेल पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ी?
पैसा, संपत्ति और विदेश कनेक्शन
बताया जा रहा है कि आरोपी ने हाल के वर्षों में करीब 150 विदेश यात्राएं की हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन यात्राओं के पीछे पैसा कहां से आया।
उसकी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है, जिससे बड़े नेटवर्क के संकेत मिल रहे हैं।
बड़ा सवाल
यह पूरा मामला एक ही बात की ओर इशारा करता है—
क्या महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है कि सालों तक महिलाओं का शोषण होता रहे और सरकार को भनक तक न लगे?
अब जबकि मामला उजागर हो चुका है, कार्रवाई जरूर हो रही है, लेकिन यह सवाल बना रहेगा कि
क्या यह न्याय है, या सिर्फ नुकसान के बाद की औपचारिकता?

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