नई दिल्ली/तेहरान/वाशिंगटन: मध्य पूर्व में जारी ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच का महायुद्ध (Operation Epic Fury) आज रविवार, 5 अप्रैल 2026 को अपने 37वें दिन में प्रवेश कर गया है। स्थिति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ‘अंतिम चेतावनी’ जारी कर दी है।
ट्रंप का अल्टीमेटम: “48 घंटे में होर्मुज खोलें या भीषण परिणाम भुगतें”
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सोमवार तक का समय देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) से अपनी नाकेबंदी नहीं हटाई और शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए, तो अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे विनाशकारी हमले शुरू करेगा। ट्रंप ने कहा, “ईरान के पास सोचने के लिए केवल 48 घंटे हैं, वरना वह अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर का सामना करेगा।”
दुस्साहसी मिशन: अमेरिकी पायलट का सफल रेस्क्यू
युद्ध के बीच अमेरिका के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। ईरान में दुर्घटनाग्रस्त हुए F-15E स्ट्राइक ईगल विमान के लापता चालक दल के सदस्य को एक गुप्त सैन्य ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित निकाल लिया गया है। ईरान ने पहले दावा किया था कि उसने इस पायलट को पकड़ लिया है और उस पर इनाम की घोषणा की थी, लेकिन अमेरिकी विशेष बलों ने इस दावे को झुठलाते हुए पायलट को रेस्क्यू कर लिया।
मुख्य बिंदु (Highlights):
48 घंटे का अल्टीमेटम: ईरान को सोमवार तक शांति वार्ता या भीषण बमबारी का चुनाव करना होगा।
पायलट की वापसी: लापता अमेरिकी पायलट का सफल रेस्क्यू, ईरान का दावा फेल।
आर्थिक चोट: महशहर पेट्रोकेमिकल ज़ोन पर इजरायल-अमेरिका का हवाई हमला।
तेल संकट: होर्मुज की नाकेबंदी से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर काले बादल।
महशहर पेट्रोकेमिकल हब और बुशहर पर हमले
इजरायल और अमेरिकी वायुसेना ने मिलकर ईरान के आर्थिक और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया है। ताज़ा हमलों में ईरान के दक्षिण-पश्चिमी शहर महशहर में स्थित विशाल पेट्रोकेमिकल ज़ोन को तबाह कर दिया गया है।
- नुकसान: इस हमले में 5 लोगों की मौत और करीब 170 लोग घायल हुए हैं।
- बुर्सेर परमाणु केंद्र: रिपोर्टों के अनुसार, बुशहर (Bushehr) परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास भी भारी धमाके सुने गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में रेडिएशन और पर्यावरणीय क्षति का डर पैदा हो गया है।
क्षेत्रीय विस्तार: कुवैत और बहरीन भी निशाने पर
ईरान समर्थित समूहों (हूतियों और अन्य मिलिशिया) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत में ऊर्जा संयंत्रों और तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों से वैश्विक तेल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है।
मानवीय और वैश्विक संकट
युद्ध की आग अब इराक और लेबनान तक भी फैल गई है, जहां नागरिक प्रदर्शनों और सैन्य संघर्षों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल युद्धविराम की अपील की है, लेकिन फिलहाल संघर्ष थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।

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