दिसपुर/गुवाहाटी: असम की 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को होने वाला मतदान केवल सत्ता का चुनाव नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की उस आक्रामक कार्यशैली पर जनमत संग्रह है, जिसने राज्य के लोकतांत्रिक मूल्यों को हाशिए पर धकेल दिया है। विकास के दावों के शोर में दबी बेरोजगारी, परिसीमन का राजनीतिक खेल और ‘बुलडोजर न्याय’ इस बार भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।
आक्रामक समीक्षा: हिमंता सरकार के पांच साल
- परिसीमन का ‘पॉलिटिकल फिक्सिंग’: विपक्ष का सीधा आरोप है कि हिमंता सरकार ने चुनाव से पहले अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए परिसीमन (Delimitation) का सहारा लिया है। कई सीटों के भूगोल को इस तरह बदला गया है जिससे अल्पसंख्यकों की राजनीतिक ताकत को कम किया जा सके और भाजपा के ‘वोट बैंक’ को सुरक्षित किया जा सके।
- अस्मिता का सौदा और ध्रुवीकरण: हिमंता बिस्वा सरमा ने पूरे कार्यकाल के दौरान ‘असली बनाम नकली’ असमिया की बहस को हवा दी है। ‘अवैध अतिक्रमण’ हटाने के नाम पर गरीब परिवारों को बेघर करने और साम्प्रदायिक बयानबाजी ने राज्य की शांति को भंग किया है।
- कर्ज में डूबा असम: चमकदार विज्ञापनों और ‘अरुणोदय’ जैसी खैरात वाली योजनाओं के पीछे की कड़वी सच्चाई यह है कि राज्य पर कर्ज का बोझ अब तक के उच्चतम स्तर पर है। सरकारी खजाने को खाली कर वोट खरीदे जाने की राजनीति पर बुद्धिजीवी वर्ग सवाल उठा रहा है।
प्रमुख दलों के दिग्गज उम्मीदवार
इस बार के चुनाव में कई दिग्गजों की साख दांव पर लगी है:
| उम्मीदवार | दल | सीट (Constituency) | मुख्य भूमिका |
|---|---|---|---|
| हिमंता बिस्वा सरमा | भाजपा | जालुकबारी (Jalukbari) | मुख्यमंत्री और सत्ता का चेहरा |
| गौरव गोगोई | कांग्रेस | टीटाबार/जोरहाट क्षेत्र | विपक्ष का मुख्य युवा चेहरा |
| अतुल बोरा | AGP | बोकाखाट (Bokakhat) | भाजपा का क्षेत्रीय सहयोगी |
| रंजीत दास | भाजपा | पाटाचारकुची (Patacharkuchi) | कैबिनेट मंत्री |
| अखिल गोगोई | राइजोर दल | शिवसागर (Sivasagar) | प्रखर आंदोलनकारी नेता |

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