झारखंड में कोयला खनन: बीते 5 वर्षों में 6,591 विस्थापित परिवारों का बसाव, R&R व मुआवजे मद में दिए गए ₹1,108 करोड़


नई दिल्ली / रांची: झारखंड में संचालित विभिन्न कोयला परियोजनाओं के कारण प्रभावित और विस्थापित हुए 6,591 परिवारों का पिछले पांच वर्षों के दौरान पुनर्वास किया गया है। इसके साथ ही, विस्थापन झेलने वाले इन परिवारों (PAF) को पुनर्वास, पुनर्व्यवस्था (R&R) तथा भूमि व परिसंपत्तियों के मुआवजे के तौर पर कुल 1,108 करोड़ रुपये की राशि भी आवंटित की गई है।

यह आधिकारिक आंकड़े केंद्रीय कोयला एवं खनन राज्य मंत्री सतीश चन्द्र दुबे ने 27 जुलाई, 2026 को राज्यसभा में सांसद परिमल नथवाणी द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में साझा किए। सांसद नथवाणी ने राज्य में कोयला खनन से प्रभावित परिवारों के आंकड़े और उन्हें दी गई राहत की विस्तृत जानकारी मांगी थी।

खनन कंपनियों के आंकड़े और राहत कार्य
संसद में पेश विवरण के अनुसार, विभिन्न उपक्रमों द्वारा किए गए कार्य निम्नलिखित हैं:
कोल इंडिया की सहयोगी इकाइयां:
भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL), ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) और एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) ने मिलकर कुल 1,791 प्रभावित परिवारों को पुनर्वासित किया। इन सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा मुआवजे के रूप में 587 करोड़ रुपये वितरित किए गए। रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हुए CCL ने 968 और ECL ने 174 विस्थापितों को नौकरियां दीं।

एनटीपीसी (NTPC) समूह की खदानें:
राज्य में संचालित एनटीपीसी की तीन प्रमुख कोयला खदानों—पकरी-बरवाडीह, चट्टी-बरियातू और केरंदरी—के कारण 4,800 परिवार प्रभावित हुए। कंपनी की ओर से इन परिवारों को 520.80 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है।

पचवारा साउथ ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (NLCIL):
इस परियोजना के तहत 86 प्रभावित परिवारों को मकान के बदले वित्तीय मुआवजा दिया गया, जबकि 5 अन्य प्रभावितों को रोजगार के स्थान पर एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

नियमित संवाद से समस्याओं का समाधान
केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि सभी पुनर्वास मामलों को ‘केस-टू-केस’ आधार पर प्राथमिकता दी गई है। R&R नीतियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने और विस्थापितों की समस्याओं का समयबद्ध निपटारा करने के लिए परियोजना प्रभावित परिवारों के साथ नियमित तौर पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं।


Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *