पेपर लीक संशोधन बिल पर बहस: प्रियंका गांधी के प्रह्लाद जोशी पर कमेंट से भारी हंगामा; रिजिजू बोले- मांगे माफी
नई दिल्ली: लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान संसद का माहौल बेहद गर्म हो गया। पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली रोकने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक पर दोपहर 2 बजे से चर्चा की शुरुआत हुई। हालांकि, नीतिगत मुद्दों के साथ-साथ यह बहस राजनीतिक तीखे बाणों और भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई।
प्रियंका गांधी का हमला और सत्ता पक्ष का विरोध
चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि “छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का अधिकार सरकार को किसने दिया?”
इसके बाद प्रियंका गांधी ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की ओर इशारा करते हुए एक बेहद विवादित टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में एक ऐसे व्यक्ति को मंत्री बनाया गया है, जिसने एक गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई पर अपनी सहमति व्यक्त की थी।
प्रियंका गांधी के इस बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने तीखा विरोध व्यक्त किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और प्रह्लाद जोशी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह शिक्षा मंत्री का चरित्र हनन करने की कोशिश है और प्रियंका गांधी को इसके लिए बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
‘बिना तथ्य बात न करें’: स्पीकर की हिदायत
हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने हस्तक्षेप किया और प्रियंका गांधी से कहा, “मैं आपसे आग्रह करूँगा कि सदन में बिना तथ्यों के इस तरह की बातें न करें।”
इस पर प्रियंका गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि वे प्रह्लाद जोशी द्वारा बिल्किस बानो मामले के संदर्भ में दिए गए बयान का प्रमाण सदन के सामने भेज देंगी।
इसी दौरान:
- केसी वेणुगोपाल (कांग्रेस): उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के सांसदों ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम लिया है, जिसे रिकॉर्ड से नहीं हटाया जा सकता।
- निशिकांत दुबे (भाजपा): उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने नेहरू जी का नाम लिया था और वे आज भी अपने दिए बयान पर पूरी तरह कायम हैं।
- प्रह्लाद जोशी: उन्होंने कहा कि उनके बारे में जो गंभीर आरोप लगाए गए, उसकी पूर्व सूचना उन्हें नहीं दी गई थी।
विवाद बढ़ता देख स्पीकर ने सदस्यों को टोकते हुए निर्देश दिया कि सदन में केवल इस विधेयक पर ही चर्चा होगी और सभी सदस्य मूल विषय तक ही सीमित रहें।
विपक्ष का तंज और चर्चा का समय बढ़ा
इससे पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार युवाओं को ‘वचन नहीं, सिर्फ जुमले देती है।’
दोपहर के सत्र की शुरुआत में स्पीकर ओम बिड़ला ने सूचित किया था कि बिल पर चर्चा के लिए 6 घंटे का समय तय किया गया है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से बातचीत की है और अब इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर 8 घंटे चर्चा होगी; जरूरत पड़ने पर सरकार 10 घंटे भी बहस के लिए तैयार है।
बिल में बदलाव: 2024 कानून vs 2026 का प्रस्तावित संशोधन
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि इस नए विधेयक से देश में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने में बड़ी मदद मिलेगी। 2024 के मूल कानून की तुलना में प्रस्तावित 2026 के संशोधन में निम्नलिखित कड़े प्रावधान किए गए हैं:
| मुद्दा | 2024 का कानून | 2026 का प्रस्तावित संशोधन |
| उद्देश्य | पेपर लीक और नकल रोकने के लिए कानून बनाया गया था। | कानून को और सख्त बनाकर जांच और ट्रायल की प्रक्रिया तेज की जाएगी। |
| सजा और जुर्माना (पेपर लीक) | 3 से 5 साल तक की जेल का प्रावधान। | कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल की जेल, साथ ही ₹50 लाख तक का जुर्माना। |
| संगठित अपराध | 5 से 10 साल की जेल और कम से कम ₹1 करोड़ जुर्माना। | कम से कम 7 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना। |
| जांच की समय-सीमा | कोई तय समय-सीमा नहीं थी। | 2 महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। |
| मुकदमे की सुनवाई | सुनवाई पूरी करने की कोई तय समय-सीमा नहीं थी। | चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य (रोजाना सुनवाई)। |
| फास्ट ट्रैक कोर्ट | स्पष्ट प्रावधान नहीं था। | राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बना सकेंगे। |
| विशेष टास्क फोर्स (STF) | ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। | जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार विशेष STF बनाकर जांच करा सकेगी। |
| अपराधों की सूची | अपराधों का विस्तृत वर्गीकरण नहीं था। | 15 तरह के अपराध स्पष्ट (जैसे ओएमआर शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट, फर्जी एडमिट कार्ड आदि)। |
| परीक्षा सुरक्षा | विस्तृत परिचालन मानक तय नहीं थे। | बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन, केंद्रों का प्री-ऑडिट, स्क्रीनिंग, प्रश्नपत्र सुरक्षा और परीक्षा के बाद की प्रक्रिया के लिए विस्तृत मानक तय होंगे। |

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