मोरहाबादी में ‘आदिवासी एकता महाजुटान’: प्रस्तावित परिसीमन और जल-जंगल-जमीन के मुद्दों पर गूंजी बदलाव की हुंकार

रांची: राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता बंधु तिर्की के नेतृत्व में विशाल ‘आदिवासी एकता महाजुटान’ का आयोजन किया गया। इस महासम्मेलन में झारखंड के कोने-कोने से लाखों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा, वाद्य यंत्रों और झंडों के साथ पहुंचे। आयोजन में महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों की भारी भागीदारी ने जनजातीय समाज की एकजुटता और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का स्पष्ट संदेश दिया।

परिसीमन में जनसंख्या को आधार बनाने का कड़ा विरोध

महाजुटान का मुख्य केंद्र बिंदु केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध रहा। मंच से बोलते हुए पूर्व मंत्री बंधु तिर्की और अन्य वक्ताओं ने आशंका जताई कि यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाकर परिसीमन किया गया, तो झारखंड में आदिवासियों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बुरी तरह प्रभावित होगा।

वक्ताओं ने मांग रखी कि झारखंड की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों, ऐतिहासिक विस्थापन और पलायन को ध्यान में रखकर ही परिसीमन तय किया जाना चाहिए। नेताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि आदिवासियों की राजनीतिक हिस्सेदारी में किसी भी प्रकार की कटौती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सीएनटी-एसपीटी एक्ट और एमएमडीआर संशोधन बिल पर केंद्र को घेरा

महाजुटान के दौरान परिसीमन के अलावा आदिवासी अस्तित्व से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए। नेताओं ने सीएनटी (Chota Nagpur Tenancy) और एसपीटी (Santhal Parganas Tenancy) एक्ट की सुरक्षा, एमएमडीआर (MMDR) संशोधन बिल, पांचवीं अनुसूची के कड़ाई से पालन तथा जल-जंगल-जमीन पर स्थानीय अधिकारों की रक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की वर्तमान नीतियां आदिवासी समाज के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं।

राजनीतिक रूप से अहम रही मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि विकास मुंडा की मौजूदगी

इस विशाल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी आमंत्रित किया गया था। यद्यपि वे व्यक्तिगत कारणों से स्वयं शामिल नहीं हो सके, लेकिन उनकी ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायक विकास कुमार मुंडा प्रतिनिधि के रूप में कार्यक्रम में पहुंचे। विकास मुंडा की उपस्थिति ने महाजुटान में सत्तारूढ़ झामुमो की औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंधु तिर्की द्वारा जुटाए गए इस अपार जनसैलाब ने न केवल कांग्रेस और आदिवासी संगठनों के पक्ष में एक मजबूत राजनीतिक माहौल तैयार किया है, बल्कि राज्य की भावी राजनीति का रुख भी तय कर दिया है। महाजुटान के समापन पर आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस आंदोलन को पंचायत और गांव स्तर तक ले जाने का संकल्प लिया गया।


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