शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी

अंततः केन्द्र सरकार को मानना पड़ा कि कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा पेपर लीक मामले पर चलाये गये आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा हिंसा हुई है, और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया.  तभी तो उसने आंदोलन के दौरान  पुलिस हिंसा की पड़ताल के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है. यह महिला प्रदर्शनकारियों पर हुए यौन-उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर जांच करेगी. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति वी मोहना और न्यायमूर्ति जॉय माल्या बागची की पीठ ने  समिति को तत्काल अंतरिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. शिकायत दर्ज करने के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की गई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत भेजने की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाएगा.

अंततः केन्द्र सरकार को मानना पड़ा कि कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा पेपर लीक मामले पर चलाये गये आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा हिंसा हुई है, और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया. तभी तो उसने आंदोलन के दौरान पुलिस हिंसा की पड़ताल के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है. यह महिला…


लंबे समय तक चले शांतिपूर्ण आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने बड़े धैर्य से पुलिसिया जुल्म को बर्दाश्त किया. प्रशासन और पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा कांटा लगे लाठी की मार झेली, पैलेट गन एवं अश्रु गैस के गोलों का सामना किया, पानी के बौछार के सामने टिके रहे. लड़कियां पुलिस के अपमानजनक व्यवहार पर भी विचलित नहीं हुई. कई वीडियो सामने आए हैं जिससे यह साबित होता है कि आंदोलनकारी उग्र नहीं हुएं, बल्कि पुलिस द्वारा ही हिंसा और क्रूरता दिखाई दी.
शिक्षा में सुधार को लेकर कई राज्यों में आंदोलन हो रहें हैं. हम जानते हैं कि हमारे देश में सरकारी स्कूलों की स्थिति जहां दयनीय  होती जा रही है, वहीं प्राइवेट स्कूलों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है. 94,000 सरकारी स्कूलों को पिछले कुछ वर्षों में बंद कर दिया गया है. जो विद्यालय चल रहे हैं, वहां की स्थिति भी बदतर है. कहीं शौचालय नहीं, तो कहीं पानी- बिजली नहीं और कहीं सड़क नहीं. बालिका विद्यालयों की स्थिति तो और भी बुरी है. शिक्षकों की कमी तो है ही.
पहले शिक्षा के लिए बजट 8 से 12 फीसदी होता था, जिसे अब घटा दिया गया है. अब इन समस्याओं के खिलाफ एक आक्रोश बन रहा है और लोग सड़कों पर उतर रहे हैं. व्यवस्थावादी लोग इसके विरोध में हिंसक वारदात को अंजाम दे रहे हैं. उत्तर प्रदेश के एक स्कूल को सुधारने के प्रयास में अब्दुल को अपनी जान गंवानी पड़ी. गुंडों ने पीटा, बचाव करने आए पिता को भी जख्मी कर दिया.
नवोदय विद्यालय, आदिवासी आवासीय विद्यालय, कस्तूरबा विद्यालय एवं अन्य विद्यालयों के बच्चों ने  अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया है. अच्छा और पर्याप्त भोजन, स्कूल में पानी, शौचालय की व्यवस्था के साथ ही अन्य मांगों को लेकर कहीं डीसी का घेराव हुआ, तो कहीं  शिक्षकों के अभाव को लेकर विद्यार्थी संघर्ष कर रहे हैं. बालिका-आवासीय विद्यालय में रहने की व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में नीचे सोई तीन बच्चियों की मौत सांप काटने से हो गई. यह हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था का हाल है.
बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान इत्यादि कई राज्यों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन, धरना इत्यादि हो रहे हैं, जो यह बताते हैं कि सरकार को अब इस पर सोचना होगा. मामला सिर्फ पेपर लीक का नहीं बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार का है. जब यह सुधरेगा तभी हम पेपर लीक जैसी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं.

लेखिका: कुमुद, साभार: संभवा इंजोर.