पीपल्स यूनियन ऑफ़ सिविल लिबर्टीज़ (पीयूसीएल) के तत्वावधान में 23 अगस्त को स्थानीय एसडीसी में ‘5वां स्टेन स्वामी स्मृति व्याख्यान’ आयोजित हुआ। व्याख्यान का विषय था “लोकतंत्र का भविष्य, छात्र युवा आंदोलन से उभरती संभावना, और मीडिया की भूमिका”। मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम में आमंत्रित वरिष्ठ पत्रकार, शीतल पी सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन ही स्टेन स्वामी को सच्ची श्रद्धांजलि है, उनके द्वारा समाज के लिए, आदिवासियों के हित के लिए किए गए कार्य हमें प्रेरित करते हैं कि हम लोकतंत्र पर होने वाले हमलों के विरोध के लिए सदा तैयार रहें। लोकतंत्र में आंदोलन होते रहने चाहिए, तभी लोकतंत्र जीवित रहेगा।
पीपल्स यूनियन ऑफ़ सिविल लिबर्टीज़ (पीयूसीएल) के तत्वावधान में 23 अगस्त को स्थानीय एसडीसी में ‘5वां स्टेन स्वामी स्मृति व्याख्यान’ आयोजित हुआ। व्याख्यान का विषय था “लोकतंत्र का भविष्य, छात्र युवा आंदोलन से उभरती संभावना, और मीडिया की भूमिका”। मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम में आमंत्रित वरिष्ठ पत्रकार, शीतल पी सिंह ने अपनी बात…
उन्होंने कहा कि हाल में देश में हुए युवाओं और छात्रों के नए आंदोलन से कई संभावनाएं उभर कर आती है, इन आंदोलनों ने जिस तरह से प्रजातंत्र की परिभाषा को फिर से दोहराया, लोगों को याद दिलाया, वह स्वागत योग्य है और लोकतंत्र को मज़ाक बना कर रखने वाली एक अकड़ू सरकार को झुकाया और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा देने को मजबूर किया।
श्री सिंह ने वक्ता के रूप में बोलते हुए कहा कि “आंदोलन पूरे देश के कई राज्यों में फैला और आज वह शिक्षा का स्तर सुधारते -सुधारते, स्कूल सुधरने तक पहुंच गया है। युवाओं के वर्तमान आंदोलन ने दलितों, वंचितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, मजदूर, किसान और सभी के बीच में नई ऊर्जा का संचार किया है।“
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन जिस तरह से पूरे देश में फैला है, जिस तरह से उत्तर प्रदेश की बच्चियों ने लखनऊ में सड़क को जाम किया है, मिड डे मील और शिक्षा की बुरी स्थिति के खिलाफ लड़ाई उभरी है, यह लड़ाई सरकार को विवश कर रही है कि वह अब सिर्फ नफरत की राजनीति के सहारे राज नहीं कर सकती है, उसे इस नफरत की राजनीति को छोड़ कर सही मुद्दों की राजनीति पर लौटना ही होगा।
सिंह ने मुद्दों पर बात रखते हुए सवाल किया कि क्या लोकतंत्र सिर्फ वोट देना रह गया है, या लोकतंत्र सत्ता से सवाल पूछना, या सत्ता के नाकामियों को उजागर करना भी है? जैसा आज युवाओं के आन्दोलन में हम देख रहे हैं कि अब युवा आपके नफ़रत के मुद्दों में नहीं बल्कि शिक्षा की गड़बड़ियों, भ्रष्टाचार, रोजगार के ऊपर सवाल पूछ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के बीच राजनीतिक चेतना को खत्म करने और लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए मौजूदा भाजपा सरकार ने लगभग सभी राज्यों में छात्र संघ चुनाव खत्म कर दिया है और जो भाजपा के छात्र संगठन नहीं हैं, उन्हें देशद्रोही बताने लगते है, आरएसएस के छात्र संगठन सिर्फ हिंदू मुस्लिम पर हंगामा करते हैं, छात्रों की समस्या पर कोई बात नहीं करते।
सिंह ने आगे कहा कि आज की मीडिया, प्रशासन, न्यायपालिका और सत्ता से मिलकर लोकतंत्र के सही मुद्दों को झुठलाने में लगी हुई हैं। आज के लोकतंत्र में मीडिया की स्थिति यह हो गई है कि मीडिया सत्ता से सवाल नहीं पूछ कर, खुद आंदोलन कर रहे लोगों को आतंकवादी, खालिस्तानी, देशद्रोही जैसे संबोधनों से नवाजने में व्यस्त हैं। जबकि छात्रों और युवाओं के पास सोशल मीडिया का जरिया बचा है जिसके जरिए वह सच को दिखाने की कोशिश कर रहे और सत्ता की मीडिया का बहिष्कार भी कर रहे हैं।
आज लोकतंत्र को कमजोर करने का एक तरीका यह भी अपनाया जा रहा है कि लगातार लोगों के दिमाग में मिथकों की कहानी, राजा रानी की कहानी डाल दी जा रही है, ताकि लोकतंत्र को कमजोर कर कैसे एक देश के सेवक को मालिक बना दिया जा सके और प्रधानमंत्री की जगह राजा को स्थापित किया जा सके, ताकि जनता मालिक ना बन कर प्रजा बन सके और सवाल पूछने के सारे अधिकार उसके खत्म हो।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार के काम आने वाले अखबार आज गोदी मीडिया बन गए हैं, खुद ही यह मानने को भी तैयार है कि वह गोदी मीडिया है। सवाल पूछने का खामियाजा यह है की उमर खालिद 6 साल से जेल में बंद है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट भी कुछ नहीं कर पा रही, क्योंकि उमर खालिद यूएपीए कानून के तहत जेल में बंद हैं, फादर स्टेन भी इसी कानून के तहत जेल गए जहां उनकी संस्थागत हत्या कर दी गई।
वहीं भ्रष्टाचार में लिप्त लोग भाजपा में आकर कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री बन गए हैं, कई बलात्कारी साधु बाबा और बाहुबली नेता जिनकी सजा तय है, जेल से बाहर घूम रहे हैं।
कार्यक्रम का संचालन लीना और अध्यक्षता पत्रकार किसलय ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी आज के संदर्भ में विषय की गंभीरता को उजागर कर रही थी।
लेखिका: डॉ किरण साभार: संभवा इंजोर.

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