राजधानी दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मतदाता सूची से 11 लाख से अधिक वोटरों के नाम हटाए जाने का बड़ा मामला सामने आया है। ‘वोटर अधिकार मंच’ की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की 70 में से 68 विधानसभा सीटों पर हटाए गए वोटरों की संख्या साल 2025 के चुनाव परिणाम में जीत-हार के अंतर से भी ज्यादा है।
अचानक तेजी से कटे नाम आंकड़ों के मुताबिक, 31 जनवरी 2025 को दिल्ली में कुल 1,56,14,000 पंजीकृत मतदाता थे। लेकिन जून 2026 के अंत तक (एसआईआर की शुरुआत से ठीक पहले) यह संख्या घटकर 1,45,10,299 पर आ गई। इस अवधि में कुल 11,03,701 वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए गए।
रिपोर्ट में मुख्य बिंदु:
- अप्रैल 2026 में रिकॉर्ड गिरावट: अकेले अप्रैल महीने में 3,39,509 नाम हटाए गए, जो पिछले छह महीनों के औसत से लगभग 20 गुना अधिक है।
- प्रमुख प्रभावित क्षेत्र: तुगलकाबाद, ओखला, आरके पुरम, कस्तूरबा नगर और कालकाजी समेत 10 से अधिक सीटों पर नाम हटाने की दर 40% से अधिक दर्ज की गई।
लोकतंत्र के ढांचे पर खतरा विश्लेषक योगेंद्र यादव के अनुसार, 2024 के आम चुनावों में जहां देश में 99 करोड़ वयस्कों पर 98 करोड़ मतदाता थे, वहीं इस प्रक्रिया के पूर्ण होने तक 103 करोड़ वयस्कों के मुकाबले वोटरों की संख्या घटकर महज 88 करोड़ रह जाने का अनुमान है। इतने बड़े पैमाने पर नामों का कम होना एक सुनियोजित कदम की ओर इशारा करता है, जिसकी आपराधिक निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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