BRICS व्यापार में भारत की चुनौती: 417 अरब डॉलर के कारोबार के बीच गहराता घाटा, निर्यात बढ़ाने का नया अवसर


नई दिल्ली। BRICS मंच भारत के लिए महज कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विशाल आर्थिक बाजार भी है। हालांकि, व्यापार आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत इस बाजार में प्रमुख विक्रेता बनने के बजाय एक बड़ा खरीदार बन गया है।

पिछले पांच वर्षों में BRICS सदस्य देशों के साथ भारत का कुल व्यापार 203.1 अरब डॉलर से बढ़कर 417.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। व्यापार का आकार दोगुने से अधिक बढ़ा है, लेकिन इस दौरान भारत का निर्यात 64.3 अरब डॉलर से मामूली रूप से बढ़कर 95.7 अरब डॉलर हुआ, जबकि आयात 138.8 अरब डॉलर से उछलकर 321.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया। आयात में इस तेज वृद्धि के कारण भारत को लगभग 226.1 अरब डॉलर (करीब 21.6 लाख करोड़ रुपये) के बड़े व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है।

आयात-निर्यात का असंतुलन
आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल आयात में BRICS की हिस्सेदारी 41.5 प्रतिशत हो चुकी है, जबकि भारत के कुल निर्यात में इनकी भागीदारी मात्र 21.7 प्रतिशत है।

चीन: वर्ष 2025-26 के दौरान चीन से भारत का आयात बढ़कर 131.6 अरब डॉलर पहुंच गया, जिसके मुकाबले भारत का चीन को निर्यात केवल 19.5 अरब डॉलर रहा।

रूस: ऊर्जा आवश्यकताओं के कारण रूस से आयात बढ़कर 55.4 अरब डॉलर हुआ।

यूएई से उम्मीद: BRICS समूह में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारतीय माल का सबसे बड़ा आयातक बनकर उभरा है, जहां भारत का निर्यात 124 प्रतिशत बढ़कर 37.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

अमेरिकी बाजार बनाम BRICS
अकेला अमेरिकी बाजार भारत के लिए BRICS के सभी 10 देशों के कुल निर्यात से बड़ा है। वर्ष 2025 में अमेरिका ने भारत से लगभग 103.8 अरब डॉलर का सामान खरीदा, जबकि 2025-26 में सभी BRICS देशों को मिलाकर भारत का कुल निर्यात 95.7 अरब डॉलर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अमेरिकी बाजार के विकल्प के बजाय BRICS को एक अतिरिक्त निर्यात इंजन के रूप में विकसित करना होगा।

भविष्य की संभावनाएं
उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) के अनुसार, 2030 तक BRICS देशों को भारत का निर्यात 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यदि भारत इस लक्ष्य को हासिल करता है, तो इससे 100 अरब डॉलर से अधिक का अतिरिक्त निर्यात अवसर पैदा होगा।

भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO) के मुताबिक, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ सकती है। दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के सामने इस विशाल बाजार में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की प्रमुख चुनौती और अवसर दोनों रहेंगे।


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