परिवारवाद पर मायावती का सर्जिकल स्ट्राइक: भतीजों की नो-एंट्री, ‘सरप्राइज फेस’ दीपिका आनंद संभाल सकती हैं BSP की कमान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति और बहुजन समाज पार्टी (BSP) में चल रहा अंदरूनी घमासान अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक लंबा बयान जारी कर पार्टी में उत्तराधिकार और परिवारवाद के मुद्दे पर स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। मायावती ने ऐलान किया है कि उनके भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों—आकाश आनंद और ईशान आनंद—की पार्टी में अब कोई एंट्री नहीं होगी। इसके साथ ही उन्होंने अपनी भतीजी दीपिका आनंद के नाम का प्रस्ताव देकर राजनीति में उनकी ‘सरप्राइज एंट्री’ का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

भतीजों का पत्ता साफ, बेटियों और मिशनरी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता

मायावती ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम गुरु कांशीराम की परंपरा को कायम रखने और बीएसपी को परिवारवाद से मुक्त कराने के लिए उठाया है।

  • आकाश-ईशान की नो-एंट्री: आकाश आनंद को लगातार तीन बार पदों से हटाने के बाद अब मायावती ने आनंद कुमार के दोनों बेटों और उनके बच्चों के लिए बसपा के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिए हैं।
  • दीपिका आनंद बन सकती हैं सहारा: मायावती ने कहा कि अगर उनके भाई आनंद कुमार (बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष) को अपनी सहायता के लिए किसी सदस्य की जरूरत है, तो वह केवल अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं।
  • कौन हैं दीपिका आनंद? दीपिका, आनंद कुमार की इकलौती बेटी हैं और फिलहाल वकालत (Law) की पढ़ाई कर रही हैं। मायावती ने कहा कि दीपिका की वफादारी, ईमानदारी और कार्यक्षमता को परखने के बाद उन्हें पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
  • विकल्प के रूप में मिशनरी कार्यकर्ता: मायावती ने यह भी जोड़ा कि अगर आनंद कुमार अपनी बेटी को राजनीति में लाने के इच्छुक नहीं होते हैं, तो वे पार्टी के किसी अन्य समर्पित और निष्ठावान ‘दलित मिशनरी कार्यकर्ता’ को यह जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।

मायावती ने क्यों लिया भाई का साथ? बयां की मजबूरी

अपनी व्यक्तिगत जिंदगी और पारिवारिक परिस्थितियों पर खुलकर बात करते हुए मायावती ने कहा:

“मैं अविवाहित हूं। एक महिला होने के नाते अपनी सुरक्षा, देखभाल और सम्मानजनक तरीके से पार्टी का काम आगे बढ़ाने के लिए मुझे मजबूरी में अपने छोटे भाई आनंद कुमार को साथ रखना पड़ा। अगर मैं लड़की न होती, तो कांशीराम जी की तरह परिवार के किसी भी सदस्य को अपने पास नहीं रखती। लेकिन अब उनके बच्चों के बड़े होने पर मुझे काफी कुछ झेलना पड़ रहा है, फिर भी मैं किसी मोह में पड़कर पार्टी को नुकसान नहीं होने दूंगी।”

कार्यकर्ताओं को अलर्ट और फेक न्यूज पर विराम

  • अनुशासनहीन नेताओं की वापसी से इनकार: मायावती ने उन खबरों को पूरी तरह से ‘फेक न्यूज’ करार दिया, जिनमें आकाश आनंद या निष्कासित नेताओं की पार्टी में वापसी के दावे किए जा रहे थे।
  • विरोधी ताकतों से सावधान रहने की हिदायत: उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि जातिवादी मीडिया, विरोधी पार्टियों और सोशल मीडिया के जहरीले व प्रायोजित प्रोपेगैंडा से बचें, जिसका मकसद बसपा को यूपी की सत्ता में आने से रोकना है।