रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं व नियुक्तियों को रद्द करने वाले राज्य सरकार के आदेश पर अपना स्थगादेश (stay) बरकरार रखा है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह की मोहलत मांगी गई, जिसे अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि इस मामले में दो दिन से अधिक का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि सामूहिक रूप से नियुक्तियों को इस तरह रद्द करना अनुचित है। याचिकाकर्ताओं के पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ने तर्क दिया कि सीआईडी (CID) जांच की स्टेटस रिपोर्ट का बहाना बनाकर सरकार हलफनामा (affidavit) पेश करने में देरी कर रही है, जबकि दोनों अलग प्रक्रियाएं हैं।
दोपहर के सत्र में जब मामले की दोबारा सुनवाई शुरू हुई, तो सरकार ने सीआईडी की जांच से जुड़ी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की, जिसका अदालत ने अवलोकन किया। इस मामले की अगली सुनवाई अब शुक्रवार को होगी।
यह आदेश जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने आकाश गौरव, निरोज व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता श्रेय मिश्रा, इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने बहस की, जबकि सरकार का पक्ष महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने रखा।
क्या है पूरा मामला?
उल्लेखनीय है कि सीआईडी जांच के शुरुआती इनपुट के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की रात उन सभी परीक्षाओं को रद्द कर दिया था जिनमें कार्यदायी संस्था TDPL शामिल थी। इसके साथ ही वर्ष 2014 के बाद हुई अन्य परीक्षाओं की जांच के निर्देश दिए गए थे। कार्मिक विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द, 6 स्थगित और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया था, जिसे अब अदालत में चुनौती दी गई है।

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