कांटाटोली मामले पर भड़का जनाक्रोश: पत्रकार विनोद कुमार बोले- ‘यह नस्ली नफरत’, सरकार और विपक्षी नेताओं पर भी उठाए सवाल

रांची: बंगाली कॉलोनी में आदिवासी युवती सलजा सांगा के साथ हुई मारपीट और बदसलूकी के मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक विभिन्न विचारकों, पत्रकारों और आम लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

‘यह महज भावनात्मक मुद्दा नहीं, नस्ली नफरत का मामला’ वरिष्ठ लेखक और पत्रकार विनोद कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इसे केवल एक सामान्य विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा:

  • नस्ली नफरत व ऐतिहासिक सवाल: यह केवल भावनात्मक मुद्दा नहीं है कि युवती को अपमानजनक शब्द कहे गए। यह एक गंभीर सामाजिक, राजनीतिक और नस्ली नफरत का मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि रांची ऐतिहासिक रूप से मुंडाओं का क्षेत्र रहा है, ऐसे में मोहल्ले के लोगों से यह पूछा जाना चाहिए कि वे यहाँ कब और कैसे बसे तथा बंगाली कॉलोनी का निर्माण कैसे हुआ। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
  • सरकार और प्रशासन की जवाबदेही: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और ‘अबुआ सरकार’ पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब ग्रामीण क्षेत्रों में आदिवासियों की सुरक्षा के लिए ‘पेसा’ कानून है, तो शहरी क्षेत्रों में आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून अब तक क्यों नहीं बना?
  • विपक्षी नेताओं से तीखे सवाल: उन्होंने भाजपा नेताओं बाबूलाल मरांडी, चंपई सोरेन और अर्जुन मुंडा को घेरते हुए पूछा कि क्या दलीय राजनीति के कारण वे इस भीषण अपमान पर चुप रहेंगे?
  • तत्काल गिरफ्तारी की मांग: विनोद कुमार ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि नामजद एफआईआर के आधार पर अभियुक्तों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए और पीड़िता को सुरक्षा मुहैया कराई जाए। साथ ही उन्होंने आदिवासी समाज से आपसी भेदभाव भूलकर कानून-सम्मत कार्रवाई के लिए एकजुट होकर आंदोलन करने की अपील की।

सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा पत्रकार विनोद कुमार के विचारों का समर्थन करते हुए आम जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं:

  • आनंद कुमार ने दुख जताते हुए टिप्पणी की कि स्थानीय ईसाई संगठनों और पड़ोस में रहने वाले युवा नेताओं ने भी पीड़िता का साथ नहीं दिया।
  • मैरी केरकेट्टा ने इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर बोलने और आदिवासी समाज का साथ देने के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।
  • पंकज किस्कू ने राजनीतिक तंत्र पर निशाना साधते हुए लिखा कि आदिवासी समाज को इन समस्याओं का समाधान स्वयं खोजना होगा। नेता चाहे किसी भी पार्टी के हों, वे हर मुद्दे को केवल वोट बैंक के नजरिए से ही देखते हैं और आदिवासियों को हमेशा कमतर आंकने की नीति अपनाई जाती है।

घटना के बाद से क्षेत्र में तनाव का माहौल है और आरोपी पक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज होती जा रही है।