मुंबई। भारतीय कॉर्पोरेट जगत के सबसे बड़े समूह टाटा संस के शीर्ष प्रबंधन में एक अभूतपूर्व कानूनी और प्रशासनिक खींचतान सामने आई है। टाटा ट्रस्ट्स ने बोर्ड के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को पांच साल का नया कार्यकाल देने के प्रस्ताव को पूरी तरह से गैर-कानूनी और निष्प्रभावी करार दिया है। ट्रस्ट्स के अनुसार, उनके चेयरमैन व नामांकित निदेशक नोएल टाटा द्वारा विरोध में मतदान करने के बाद यह फैसला नियमों के तहत अवैध हो चुका है।
पुनर्नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट्स का क्या है तर्क?
टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के नियमों के मुताबिक, चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव मान्य होने के लिए टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नामांकित दोनों निदेशकों की सहमति अनिवार्य है।
- नोएल टाटा का विरोध: बृहस्पतिवार को बोर्ड बैठक में चार निदेशकों के समर्थन और नोएल टाटा के विरोध के बाद यह प्रस्ताव पास किया गया था।
- पूर्व सीजेआई की कानूनी राय: नोएल टाटा ने देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ की एक विस्तृत कानूनी राय बोर्ड के समक्ष रखी, जिसके तहत एक नामांकित निदेशक की असहमति के कारण यह प्रस्ताव कानूनी रूप से अमान्य हो जाता है।
- 12 अगस्त का फैसला: नोएल टाटा ने स्पष्ट किया कि चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को स्वेच्छा से 20 फरवरी 2027 के बाद पद पर न रहने का फैसला लिया था, जिसे पहले ही स्वीकार किया जा चुका था।
आरबीआई के फैसले के बाद बदला बोर्ड का रुख
यह विवाद तब गहराया जब 11 सितंबर को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी का रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी। आरबीआई के नियमानुसार टाटा संस को ‘अपर लेयर’ एनबीएफसी के रूप में शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। बोर्ड का मानना है कि संभावित आईपीओ (IPO) से पहले निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए शीर्ष नेतृत्व में निरंतरता जरूरी है।
लिस्टिंग और उत्तराधिकार को लेकर खींचतान
| पक्ष | रुख और शेयरहोल्डिंग |
| टाटा ट्रस्ट्स (नोएल टाटा) | 66% हिस्सेदारी; लिस्टिंग का विरोध; नए उत्तराधिकारी की खोज जारी रखने का फैसला। |
| शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप | 18% हिस्सेदारी; पारदर्शी मूल्यांकन व लिक्विडिटी के लिए लिस्टिंग का समर्थन। |
यदि टाटा संस का आईपीओ आता है, तो यह भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होगा, जिससे कंपनी का अनुमानित मूल्यांकन लगभग ₹20 लाख करोड़ ($230 बिलियन) बैठता है। फिलहाल, टाटा ट्रस्ट्स ने स्पष्ट कर दिया है कि चयन समिति नियमानुसार नए चेयरमैन की तलाश जारी रखेगी।

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