भुवनेश्वर: दक्षिण ओडिशा में वेदांता के सिजीमाली बॉक्साइट माइनिंग प्रोजेक्ट के खिलाफ चल रहे जन-आंदोलन के बीच, ‘कंसर्न्ड सिटिज़न्स फोरम’ ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। फोरम ने डोंगरिया कोंध नेता लाडा सिकाका की गिरफ्तारी और विरोध के प्रमुख केंद्रों—कांतामल तथा तलाम्पदार गांवों—में सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती की कड़ी निंदा की है।
वकीलों, मानवाधिकार संगठनों, ट्रेड यूनियनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों वाले इस फोरम ने लाडा सिकाका की तत्काल रिहाई और प्रभावित गांवों से पुलिस बल हटाने की मांग करते हुए एक विस्तृत बयान जारी किया है।
जमानत मिलते ही फिर हिरासत में लेने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 10 सितंबर को शाम लगभग 4:30 बजे नियमगिरि सुरक्षा समिति के अध्यक्ष लाडा सिकाका जब लांजीगढ़ अदालत से एक मामले में जमानत मिलने के बाद लौट रहे थे, तब कल्याणसिंहपुर के पास पुलिस टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। फोरम का आरोप है कि गिरफ्तारी के 24 घंटे बाद तक उनके ठिकाने की सही जानकारी नहीं दी गई और बाद में 9 साल पुराने एक मामले के आधार पर उन्हें देर रात अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया।
इसी घटनाक्रम के दौरान, खनन का विरोध कर रहे कांतामल और तलाम्पदार गांवों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया, जिससे क्षेत्र में तनाव व्याप्त है।
तीन वर्षों में 43 मामले, 100 से अधिक गिरफ्तारियां
सिटिज़न्स फोरम ने आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले तीन सालों में स्थानीय ग्रामीणों पर कम से कम 43 पुलिस केस दर्ज किए गए हैं और 100 से अधिक आदिवासियों व दलितों को जेल भेजा गया है। मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान ही दर्जनों लोगों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए।
इसके अतिरिक्त, आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ विचारकों और नेताओं—जैसे सोशलिस्ट पीपल्स काउंसिल के लिंगराज आजाद और ‘मा माटी माली सुरक्षा मंच’ के हीरामाल नाइक—भी विभिन्न मामलों के तहत जेल में बंद हैं। फोरम का कहना है कि यह कार्रवाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ न होकर, संपूर्ण आंदोलन को दबाने का प्रयास है।
पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों पर चिंता
बयान में कहा गया है कि संविधान की पाँचवीं अनुसूची के तहत संरक्षित इन क्षेत्रों में खनन पट्टों के आवंटन से पूर्वी घाट की जैव-विविधता, जल संसाधनों और स्थानीय संस्कृतियों को अपूरणीय क्षति पहुँचेगी। फोरम ने चेताया कि विकास के नाम पर जन-आकांक्षाओं को नज़रअंदाज़ करने से क्षेत्र में असंतोष बढ़ रहा है।
सिटिज़न्स फोरम की मुख्य मांगें:
नेताओं की रिहाई: लाडा सिकाका, लिंगराज आजाद और हीरामाल नाइक को तुरंत रिहा किया जाए।
बल की वापसी: कांतामल और तलाम्पदार गांवों से सशस्त्र पुलिस बलों को हटाया जाए ताकि ग्रामीण सामान्य जीवन जी सकें।
खनन लीज़ का रद्द होना: क्षेत्र में बॉक्साइट खनन के सभी पट्टे रद्द किए जाएं और स्थानीय समुदाय की सहमति व संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाए।

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