रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ भूमि से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा उनकी डिस्चार्ज याचिका निरस्त किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए हेमंत सोरेन की हस्तक्षेप याचिका को खारिज कर दिया है। इस निर्णय के साथ ही विशेष अदालत में उनके विरुद्ध आरोप तय करने (चार्ज फ्रेम) की प्रक्रिया का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है।
16 सितंबर को सुरक्षित रखा गया था फैसला
उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता की ओर से विशेष अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। न्यायमूर्ति की अदालत ने 16 सितंबर को दोनों पक्षों की विस्तृत बहस और दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार को सुनाया गया।
यह पूरा मामला बड़गाईं अंचल स्थित 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और गैर-कानूनी हस्तांतरण से संबंधित है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है।
19 सितंबर को PMLA कोर्ट में होना होगा उपस्थित
उच्च न्यायालय के इस आदेश के पश्चात अब रांची स्थित विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत में मुख्यमंत्री के खिलाफ आरोप गठित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। इस संबंध में सुनवाई के लिए 19 सितंबर की तिथि पूर्व से निर्धारित की गई है, जिसमें हेमंत सोरेन की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक होगी।
क्या हैं मुख्य आरोप और ED का पक्ष
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि उक्त भूमि के सौदे में फर्जी कागजात और अवैध तौर-तरीकों का सहारा लिया गया। हालांकि, बचाव पक्ष का तर्क रहा है कि उनके विरुद्ध कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं हैं और एजेंसी द्वारा प्रस्तुत बयानों व परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए थे।
इसके विपरीत, ईडी ने अदालत में स्पष्ट किया कि अब तक की तफ्तीश में मिले दस्तावेज, साक्षियों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रथम दृष्टया मामला बनाने के लिए पर्याप्त हैं। इससे पूर्व, 8 जून को विशेष पीएमएलए अदालत ने भी पर्याप्त आधार का उल्लेख करते हुए हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी थी।

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