11वें आयुर्वेद दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित, ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ विषय पर मंथन

राँची। सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (सं. 108/2026) के अनुसार, बुधवार को 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयुष निदेशक श्री दिनेश कुमार यादव ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन, वैज्ञानिक और समग्र चिकित्सा पद्धति है। यह केवल रोगों के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और मानसिक शांति के जरिए निरोगी जीवन जीने की राह दिखाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में बदलती जीवनशैली, तनाव और पर्यावरणीय चुनौतियों के कारण बीमारियाँ बढ़ रही हैं, जिससे आयुर्वेद की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है।

आयुष निदेशक ने इस पद्धति को जन-जन तक पहुँचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया। उन्होंने ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात आयुष कर्मियों, योग प्रशिक्षकों और सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों से अपील की कि वे औषधीय पौधों, योग और स्वस्थ दिनचर्या के प्रति लोगों को जागरूक करें ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक इसका लाभ पहुँचे।

कार्यक्रम के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए:

श्री शिवजी वर्मा ने निष्ठापूर्वक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने और दीर्घायु जीवन प्राप्त करने के उपाय साझा किए।

डॉ. कृष्ण कुमार (उप निदेशक, आयुर्वेद) ने आयुर्वेद के जरिए आम जनमानस तक स्वास्थ्य लाभ पहुँचाने की तकनीकों की जानकारी दी और कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया।

डॉ. वकील कुमार सिंह (निबंधक, झारखंड राज्य आयुष चिकित्सा परिषद) ने आयुर्वेद के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला।

इस अवसर पर परिसर में औषधीय पौधों का रोपण भी किया गया। कार्यक्रम में यूनानी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. फजलुस समी, होम्योपैथिक चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निर्मल कुमार, राज्य समन्वयक डॉ. अनुज कुमार मंडल समेत राँची जिले के विभिन्न आयुष कर्मी और योग प्रशिक्षक उपस्थित रहे।

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