उम्मीदों की बरसात करने वाली पुस्तक है- फैसले जो नज़ीर बन गये
भारतीय न्यायपालिका की स्वायत्तता एवं निष्पक्षता को लेकर चाहे न्यायविदों, राजनीतिज्ञों या आम आदमी के बीच जितनी भी बहस होती रही हों या समय-समय पर देश के वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा न्यायपालिका पर गंभीर टिप्पणियां की जाती रही हों, पर सच … Read the rest








