पश्चिम एशिया संघर्ष में पाकिस्तान की मध्यस्थता की खबरों के बीच मोदी सरकार द्वारा उसे “दलाल राष्ट्र” कहे जाने पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि “स्वघोषित विश्वगुरु” की कूटनीतिक और विमर्श (narrative) संबंधी विफलताओं ने एक “बर्बाद देश को बिचौलिया (ब्रोकर) देश” बना दिया है।
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि सुशिक्षित और अनुभवी विदेश मंत्री एस. जयशंकर भारत की “घोर शर्मिंदगी” और क्षेत्रीय कूटनीति को लगे झटके को छिपाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए पाकिस्तान का एक मध्यस्थ और वार्ता की सुविधा देने वाले के रूप में उभरना भारत के लिए एक बड़ा झटका है।
रमेश ने ‘X’ पर लिखा, “यह वास्तव में भयावह है कि पाकिस्तान को इस भूमिका के लिए फिट माना जा रहा है। यह वह देश है जिसकी सत्ता ने चार दशकों से अधिक समय तक भारत और अन्य देशों में आतंकवाद प्रायोजित किया; ओसामा बिन लादेन जैसे खूंखार वैश्विक आतंकियों को शरण दी और दूसरे देशों को परमाणु संपन्न बनाने के लिए परमाणु अप्रसार कानूनों को बुरी तरह तोड़ा।”
उन्होंने आगे कहा, “एक्यू खान नेटवर्क की भूमिका जगजाहिर है जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति मुशर्रफ ने खुद स्वीकार किया था। इस देश ने अफगानिस्तान में अस्पतालों और नागरिक सुविधाओं पर बेरहमी से बमबारी की और बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा जैसे अपने ही प्रांतों में नागरिकों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ युद्ध छेड़ा।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका के योग्य माना जाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की शैली और सार दोनों पर सबसे बड़ा कलंक है, जो केवल खोखली बयानबाजी से भरी और कायरता से चिह्नित रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 26/11 के मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ गया था क्योंकि डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार दुनिया को पाकिस्तान की नापाक भूमिका के बारे में समझाने में सफल रही थी।
रमेश ने तंज कसते हुए कहा, “इसके विपरीत, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमलों के लिए पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के भड़काऊ बयानों के बावजूद, हम अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रहे हैं।” उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान अब एक अधिक प्रासंगिक अभिनेता के रूप में उभरा है और 10 मई 2025 के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम के पसंदीदा बन गए हैं।
उन्होंने कहा, “विदेश मंत्री ने कल रात कहा कि भारत ‘दलाल’ देश नहीं है। जो भी हो, तथ्य यही है कि हमारी कूटनीति और आउटरीच की भारी विफलताओं ने एक बर्बाद देश को ‘बिचौलिया’ देश बना दिया है। स्वघोषित विश्वगुरु का हमारे कूटनीतिक रिकॉर्ड में यही एकमात्र योगदान है, जिसे विदेश मंत्री की ‘वन-लाइनर्स’ (चुटकुलेबाजी) मिटा नहीं सकती।”
इससे पहले बुधवार को भी कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि “मोदी की हगलोमेसी” (गले मिलने की कूटनीति) की विफलता है कि एक टूटा हुआ देश अब ‘दलाल देश’ बनने की ओर अग्रसर है। विपक्षी दल का यह हमला उस सर्वदलीय बैठक के बाद आया जिसमें सरकार ने कहा था कि पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों में कुछ नया नहीं है क्योंकि अमेरिका 1981 से उसका इस्तेमाल करता आ रहा है।
बैठक में जयशंकर ने कथित तौर पर कहा था, “हम पाकिस्तान की तरह दलाल राष्ट्र नहीं हैं।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर पूछा, “जब मोदी रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता के लिए बेताब थे, तब क्या भारत ‘दलाल देश’ था? क्या यह चयनात्मक दलाली है या चयनात्मक याददाश्त?”
विपक्ष ने सरकार द्वारा बैठक में दिए गए जवाबों को “असंतोषजनक” बताया और लोकसभा व राज्यसभा दोनों में पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की मांग की है।

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