यूज मेल डॉट इन द्वारा चलायी जा रही श्रृंखला ‘बदल रहा है आदिवासी समाज’ की 7वीं कड़ी में सुनिये आदिवासी उपन्यासकार समीर भगत से साहित्यकार महादेव टोप्पो की बातचीत। समीर भगत अपने अंग्रेजी उपन्यास Salvaging Adidweep को लेकर काफी चर्चा में आये। समीर का मानना है संपन्न झारखंड के गरीब निवासियों को हमेशा अनदेखा किया जाता रहा। अपने उपन्यास के जरिये उन्होंने इतिहास की भी परतें उधेड़ी हैं। वह कहते हैं महात्मा गांधी ने टाना भगतों द्वारा अंग्रेजाें के खिलाफ आरंभ किये गए आंदोलन को ही आगे बढ़ाया जो भारत की आजादी का आंदोलन बना। समीर ने अपनी पुस्तक में सलवा जुडूम के आतंक को अपने उपन्यास के केंद्र में रखा है। युवा आदिवासी समीर भगत झारखंड के एक राजनीतिज्ञ परिवार से आते हैं। कार्तिक उरावं, बंदी उरावं, गीताश्री उरावं, प्रवीण उरावं, आदि उनके निकट के संबंधी हैं। समीर के पिता डॉ नरेन्द्र भगत झारखंड के जाने माने शिक्षाविद हैं। समीर की शिक्षा महानगरों में हुई। बैंक अधिकारी के तौर पर काम किये लेकिन अंतत: अपने प्रदेश झारखंड के प्रति उनका प्रेम उमड़ पड़ा और वे घर लौट आये।
Tribal Novelist Sameer Bhagat talks News Mail
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/ March 25, 2019
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