आईएएस पूजा सिंघल की पोस्टिंग रोकने के लिए ईडी की याचिका पर कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

रांची: मनी लॉन्ड्रिंग की आरोपी आईएएस पूजा सिंघल की किसी विभाग में पोस्टिंग पर रोक लगाने की मांग वाली ईडी की याचिका पर सोमवार को रांची के पीएमएलए कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अपना फैसला 21 फरवरी तक के लिए सुरक्षित रख लिया है।

ईडी ने अपनी याचिका में दलील दी है कि पूजा सिंघल मनरेगा घोटाले से अवैध कमाई करने से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के केस में ट्रायल फेस कर रही हैं। जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद उन्हें झारखंड सरकार ने निलंबन मुक्त कर दिया है। अगर सरकार उन्हें किसी विभाग में पोस्टिंग देती है, तो वह केस से जुड़े सबूतों को प्रभावित कर सकती हैं। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी हवाला दिया गया है।

एजेंसी ने अदालत से मांग की है कि उन्हें किसी भी विभाग में पदस्थापित करने पर रोक लगाई जाए। ईडी की इस याचिका पर पूजा सिंघल के वकील ने उनका पक्ष रखा।

झारखंड के खूंटी जिले में मनरेगा घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में करीब 28 महीने तक जेल में बंद रहने के बाद पूजा सिंघल को सितंबर 2024 में पीएमएलए कोर्ट से जमानत मिली थी। उन्हें भारत नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (बीएनएसएस 2023) के एक प्रावधान के तहत राहत मिली थी, जिसमें प्रावधान है कि अगर कोई आरोपी लंबे समय से जेल में बंद है और उसने उस मामले में दी जाने वाली कुल सजा की एक तिहाई अवधि जेल में बिता ली है, तो उसे जमानत दी जा सकती है।

कोर्ट ने दो-दो लाख रुपये के निजी मुचलके और पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर जमानत दी थी। उन्हें जमानत मिलने के बाद 21 जनवरी को राज्य सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने निलंबन मुक्त किया है।


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