नीट के गुनहगारों के खिलाफ सोनम वांगचुक का आर-पार: 18वें दिन हालत बेहद नाजुक, 20 जुलाई को संसद घेरने की तैयारी!

लद्दाख के सुप्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा अनिश्चितकालीन अनशन आज अठारहवें दिन में प्रवेश कर गया है। यह आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नामक युवाओं के एक बड़े सोशल मीडिया नेटवर्क और विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है। इस देशव्यापी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य नीट (NEET-UG) मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक और वित्तीय गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय करना है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें, परीक्षा प्रणाली में कड़े और पारदर्शी सुधार किए जाएं, तथा पेपर लीक के मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का वित्तीय मुआवजा दिया जाए।

पिछले अठारह दिनों से केवल पानी के सहारे बैठे सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति अब अत्यंत चिंताजनक और जीवन के लिए खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। डॉक्टरों की मेडिकल टीम द्वारा की गई जांच के अनुसार, अनशन के दौरान उनका वजन लगभग 8.9 किलोग्राम कम हो गया है। उनका ब्लड प्रेशर लगातार गिरकर 105/76 तक पहुंच चुका है और रक्त में ग्लूकोज का स्तर न्यूनतम होने के कारण उन्हें गंभीर शारीरिक कमजोरी, मांसपेशियों में अत्यधिक दर्द तथा बार-बार चक्कर आने की शिकायत हो रही है। जंतर-मंतर पर तैनात डॉक्टरों का दल चौबीसों घंटे उनके स्वास्थ्य मानकों की निगरानी कर रहा है।

इस बिगड़ती स्थिति को देखते हुए अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। याचिका में वांगचुक के जीवन को आसन्न खतरे का हवाला देते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को कड़ा नोटिस जारी किया है और कल तक इस पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से यह भी गुहार लगाई है कि वांगचुक की जान बचाने के लिए प्रशासन को उन्हें जबरन लिक्विड डाइट, प्रोटीन और जरूरी विटामिन देने (फ़ोर्स-फ़ीड) का आदेश जारी किया जाए।

वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए नागरिक समाज और देश के राजनीतिक हलकों में गहरी चिंता व्याप्त है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, सांसद महुआ मोइत्रा और केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा सहित कई दिग्गज विपक्षी नेताओं ने उनके संघर्ष की सराहना करते हुए उनसे जीवन की रक्षा के लिए अनशन तोड़ने की भावुक अपील की है। इसके साथ ही कला और साहित्य जगत से अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, ओमी वैद्य, लेखिका अरुंधति रॉय और अर्थशास्त्री प्रोफेसर जयती घोष जैसी प्रमुख हस्तियों ने भी उनसे मुलाकात कर या संदेश भेजकर उपवास समाप्त करने का आग्रह किया है।

इस बीच, आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए प्रदर्शनकारियों ने एक बड़ी रणनीति की घोषणा की है। आगामी 20 जुलाई को, जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है, आंदोलनकारियों और छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक विशाल और शांतिपूर्ण मार्च निकालने का आह्वान किया है। इस मार्च में देश भर से भारी संख्या में छात्रों और नागरिकों के जुटने की उम्मीद है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और गंभीर होते जा रहे स्वास्थ्य संकट के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से अभी तक आंदोलनकारियों से बातचीत करने या उनकी मांगों पर विचार करने की कोई आधिकारिक पहल सामने नहीं आई है।


Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *