वॉशिंगटन/यरूशलम/तेहरान, 8 अप्रैल 2026
ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से शुरू हुई ‘शांति की कोशिशों’ पर इजरायल ने पानी फेर दिया है। युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही पलों बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक बयान ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है।
इजरायल का रुख: “समझौता कागज पर, जंग मैदान में”
इजरायली प्रधानमंत्री ने युद्धविराम की खबरों के बीच स्पष्ट किया कि इजरायल किसी भी ‘सशर्त शांति’ का हिस्सा नहीं है। नेतन्याहू ने कहा, “जब तक ईरान की मिसाइल क्षमताएं और परमाणु ठिकाने मलबे में तब्दील नहीं हो जाते, इजरायल चैन से नहीं बैठेगा।” तेल अवीव से मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने पिछले 24 घंटों में ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर ‘ऑपरेशन फिनिक्स’ के तहत भारी बमबारी जारी रखी है। इजरायल का दावा है कि शांति की आड़ में ईरान अपनी सेना को पुनर्गठित कर रहा है।
तेल की कीमतों में लगी ‘आग’
युद्ध की इस अनिश्चितता ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। जैसे ही हर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को आंशिक रूप से खोलने की खबर आई, बाजार में भारी अस्थिरता देखी गई।
- $150 के पार कच्चा तेल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं।
- सप्लाई चेन ठप: हालांकि ईरान ने हर्मुज को खोलने पर सहमति जताई है, लेकिन बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों का प्रीमियम 500% तक बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन लगभग ठप हो गई है।
महाशक्ति का दबाव और हकीकत
राष्ट्रपति ट्रंप के अल्टीमेटम के बावजूद, जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अब तक इस युद्ध में 3,400 से अधिक मौतें दर्ज हो चुकी हैं। लेबनान का बुनियादी ढांचा पूरी तरह तबाह हो चुका है और ईरान की राजधानी तेहरान में ब्लैकआउट की स्थिति है।
अब पूरी दुनिया की नजरें 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर टिकी हैं। क्या यह केवल 14 दिनों की मोहलत है या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने से वापस लौटेगी?
ट्रंप की ‘दो टूक’: हर्मुज खोलो या मलबे में तब्दील होने को तैयार रहो; ईरान के सामने झुका अमेरिका या ये महाविनाश से पहले की शांति?
वॉशिंगटन/तेहरान, 8 अप्रैल 2026
दुनिया की सांसें थमी हुई हैं। महाविनाश की कगार पर खड़े पश्चिम एशिया में आज एक चौंकाने वाला मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ होने वाले भीषण हमलों को दो हफ्तों के लिए टालने का ऐलान किया है। लेकिन इस ‘युद्धविराम’ की चमक के पीछे बारूद की गंध साफ़ महसूस की जा सकती है।
शर्तों का जाल या कूटनीतिक जीत?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि यह राहत खैरात में नहीं दी गई है। इसकी सबसे बड़ी और कड़ी शर्त है—हर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत खोलना। वैश्विक अर्थव्यवस्था की रग कही जाने वाली इस समुद्री राह को ईरान ने बंद कर रखा था। पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद ईरान इस शर्त पर झुकता तो दिख रहा है, लेकिन सवाल वही है कि क्या यह समझौता टिकाऊ है?
शांति की घोषणा और मिसाइलों की गूँज
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ इस्लामाबाद में 10 अप्रैल को होने वाली आमने-सामने की बातचीत की मेज सज रही है, तो दूसरी तरफ आसमान से आग बरस रही है। शांति समझौते की स्याही सूखी भी नहीं थी कि इजरायल ने ईरान पर ताजा मिसाइल हमलों का दावा कर दिया। इजरायली सेना का रुख साफ है—जब तक खतरा जड़ से खत्म नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
तबाही का खौफनाक मंजर
28 फरवरी से शुरू हुए इस खूनी संघर्ष ने अब तक 3,400 से अधिक जिंदगियां लील ली हैं। लेबनान से लेकर तेहरान तक, बुनियादी ढांचा खंडहर बन चुका है। ट्रंप का यह 14 दिनों का ‘अल्टीमेटम’ ईरान के लिए संभलने का आखिरी मौका है या अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को दोबारा संगठित (Regroup) करने के लिए समय ले रहा है, इसका पता आने वाले कुछ घंटों में चल जाएगा।
शर्तों का जाल या कूटनीतिक जीत?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि यह राहत खैरात में नहीं दी गई है। इसकी सबसे बड़ी और कड़ी शर्त है—हर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत खोलना। वैश्विक अर्थव्यवस्था की रग कही जाने वाली इस समुद्री राह को ईरान ने बंद कर रखा था। पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद ईरान इस शर्त पर झुकता तो दिख रहा है, लेकिन सवाल वही है कि क्या यह समझौता टिकाऊ है?
शांति की घोषणा और मिसाइलों की गूँज
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ इस्लामाबाद में 10 अप्रैल को होने वाली आमने-सामने की बातचीत की मेज सज रही है, तो दूसरी तरफ आसमान से आग बरस रही है। शांति समझौते की स्याही सूखी भी नहीं थी कि इजरायल ने ईरान पर ताजा मिसाइल हमलों का दावा कर दिया। इजरायली सेना का रुख साफ है—जब तक खतरा जड़ से खत्म नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
तबाही का खौफनाक मंजर
28 फरवरी से शुरू हुए इस खूनी संघर्ष ने अब तक 3,400 से अधिक जिंदगियां लील ली हैं। लेबनान से लेकर तेहरान तक, बुनियादी ढांचा खंडहर बन चुका है। ट्रंप का यह 14 दिनों का ‘अल्टीमेटम’ ईरान के लिए संभलने का आखिरी मौका है या अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को दोबारा संगठित (Regroup) करने के लिए समय ले रहा है, इसका पता आने वाले कुछ घंटों में चल जाएगा।

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