हथकरघा दिवस: झारखंड का हथकरघा उद्योग को पहचान मिल रही है

रांची: झारखंड की हथकरघा (हैंडलूम) विरासत सिर्फ़ कपड़ों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह परंपरा, कारीगरी और सांस्कृतिक पहचान की एक जीवंत अभिव्यक्ति है। टसर सिल्क और कुचाई सिल्क की नफ़ासत से लेकर भागैया और पांची साड़ियों की सदाबहार सुंदरता तक, हर बुनाई में पीढ़ियों का हुनर ​​और समर्पण झलकता है।


राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर, उन सभी बुनकरों और कारीगरों का दिल से आभार जो इस शानदार विरासत को संजोए हुए हैं। झारखंड के राज्‍य सभा सांसद परिमल नथवानी ने यह टिप्‍पणी अपने सोशल मीडिया एकाउन्‍ट पर की है। कई अन्‍य जानी-मानी हस्तियों ने भी हथकरघा दिवस पर बधाइयों का तांता लगा दिया है।