कहानियों का वंश फलता-फूलता रहे! – पुस्तक समीक्षा
लेखिका (किरण जी) की रचना प्रक्रिया से एक हद तक जुड़ा रहा हूं- इस तरह कि आम तौर पर उनकी अमूमन कहानी छपने से पहले पढ़ने को मिल जाती है. पत्रकारिता से जुड़े रहने के कारण हिज्जे व व्याकरण दुरुस्त … Read the rest







