Author: श्रीनिवास

  • ‘मनुस्मृति’ का बचाव, यानी ‘ब्राह्मणवादी समाज व्यवस्था का बचाव!

    ‘मनुस्मृति’ का बचाव, यानी ‘ब्राह्मणवादी समाज व्यवस्था का बचाव!

    अचानक एक खास जमात ‘मनुस्मृति’ का बचाव करने मैदान में उतर गयी है- अभी इस अभियान का एक अतिरिक्त मकसद भी है, लगे हाथ राहुल गांधी और कांग्रेस को हिंदू विरोधी साबित करना. ‘गोदी मीडिया’ को सहयोगी भूमिका में रहना ही था. वैसे भी हिंदी पट्टी के पत्रकार जगत, टीवी सहित, में सवर्णों का वर्चस्व…

  • महिलाओं के ‘सम्मान’ का एक और उदाहरण!

    महिलाओं के ‘सम्मान’ का एक और उदाहरण!

    मध्य प्रदेश सरकार एक महिला फौजी अफसर कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘आतंकवादियों की बहन’ बताने वाले अपने मंत्री विजय शाह को बचाने में लगी हुई है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को सेना की ओर से ब्रीफिंग करते देखना एक सुखद आश्चर्य था! यह सेना की; और भारत की सेकुलर परंपरा के भी…

  • प्रियंका गांधी पर नाराज देश के शीर्ष शिक्षाविद!

    खबरों के मुताबिक कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की एक टिप्पणी को लेकर 215 कुलपतियों, पूर्व कुलपतियों और शिक्षाविदों ने खुला पत्र लिख कर नाराजगी जताई है. उन्होंने वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के सम्मान, अकादमिक गरिमा और तर्क आधारित सार्वजनिक विमर्श को बनाये रखने की अपील की है. गत 30 जुलाई को लोकसभा में चर्चा के दौरान…

  • ‘मैं वापस आऊँगा’ के बहाने

    ‘मैं वापस आऊँगा’ के बहाने

    इम्तियाज अली की यह चर्चित फिल्म मैंने देखी नहीं है, इसलिए यह फिल्म की समीक्षा नहीं है! पर फिल्म देख चुके शशिकांत जी द्वारा एक समूह पर पेश उनके अनुभव से मुझे विभाजन की त्रासदी पर आधारित कृष्ण चंदर का उपन्यास ‘गद्दार’ याद आ गया! खास कर इस अंश को पढ़ कर- ”…इस मूवी में…

  • कलियुग का ‘अयोध्या कांड’ : ’आस्था’ के नाम पर

    कलियुग का ‘अयोध्या कांड’ : ’आस्था’ के नाम पर

    हिंदुओं की आस्था के अनुसार रामकथा त्रेता युग की है। प्रचलित कथाओं (बाल्मीकि की रामायण और तुलसीदास रचित ‘रामचरित मानस’) में ‘अयोध्या कांड’ में राम के जन्म से लेकर युवा होने तक की कथा है. वह कथा सर्वविदित है. यहाँ बात बीसवीं और 21 वीं सदी में हुए ‘अयोध्या कांड’ की हो रही है! उसके…

  • स्त्री को देवी मानना बंद कीजिए!

    स्त्री को देवी मानना बंद कीजिए!

    पत्नी द्वारा पति की या किसी युवती द्वारा अपने प्रेमी के साथ मिल कर मंगेतर की हत्या या हत्या के प्रयास की हाल की कुछ घटनाएं बेशक चिंताजनक हैं! मगर इन चंद घटनाओं के आधार पर कुछ लोग इसे महिलाओं में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति, नारी सुलभ भावनाओं में कमी के रूप में देख रहे हैं.…

  • केरल के बहाने ‘आलाकमान कल्चर’ की कुछ बात

    केरल के बहाने ‘आलाकमान कल्चर’ की कुछ बात

    दस दिन की जद्दोजहद के बाद अंततः केरल (अब केरलम) के मुख्यमंत्री का नाम तय हो गया- बीडी सतीशन! विरोधी तंज कर रहे हैं- कांग्रेस मुख्यमंत्री का नाम तय करने में हाँफ गयी, कि आलाकमान (इशारा राहुल गांधी की ओर ही है) की भद्द पिट गयी! यह भी कि राहुल गांधी अपने चहेते के वेणुगोपाल…

  • मातृ-दिवस : मातृत्व का अतिशय महिममंडन

    मातृ-दिवस : मातृत्व का अतिशय महिममंडन

    आज अखबारों में, सोशल मीडिया पर ‘मां’ छायी हुई है, ‘खास’ और आम लोग अपनी-अपनी ‘मां’ के बारे में बता रहे हैं. मांएं भी मातृत्व के अद्भुत सुख के अनुभव बता रही हैं. पर मुझे इसमें एक पाखंड नजर आता है. यह भी कि ‘मां’ और मातृत्व का हमेशा से कुछ ज्यादा ही महिमा मंडन…

  • हिंदू बनाम हिंदू : उम्मीद करें कि बंगाल में यही हुआ हो

    हिंदू बनाम हिंदू : उम्मीद करें कि बंगाल में यही हुआ हो

    यह डॉ लोहिया के एक लेख का शीर्षक है, जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत में हजारों वर्षों से ‘हिंदू बनाम हिंदू’ का संघर्ष चलता रहा है- उदार हिंदू और अनुदार हिंदू के बीच. उनके अनुसार जब-जब अनुदान हिंदू की जीत होती है, भारत कमजोर होता है; उदार हिंदू जीतता है तो भारत समृद्ध और…

  • डॉ आंबेडकर से चंद असहमतियां

    डॉ आंबेडकर से चंद असहमतियां

    कल पूरे देश के साथ मैंने भी बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर के प्रति श्रद्धा व्यक्त की. मेरी श्रद्धा (इसे मैं ‘सम्मान’ कहना पसंद करता हूं) दिखावटी नहीं थी. मैं मानता हूं कि वह एक विलक्षण प्रतिभा के धनी, जिस पर देश और मानवता को गर्व करना चाहिए. जिन स्थितियों में और जिस समुदाय में…

  • असम चुनाव : कथित भाजपा विरोधी दलों को कांग्रेस से कुछ ज्यादा ही कष्ट है!

    असम चुनाव : कथित भाजपा विरोधी दलों को कांग्रेस से कुछ ज्यादा ही कष्ट है!

    असम, केरल और पुददुचेरी में मतदान हो गया. सबसे ‘सुरक्षित’ भविष्यवाणी- ऊंट किस करवट बैठेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता! फिलहाल असम की बात. वहाँ के चुनावी परिदृश्य से तो ऐसा ही लगा कि कथित भाजपा विरोधी दलौं को कांग्रेस से कुछ ज्यादा ही कष्ट है. वैसे भी आमतौर पर भाजपा के विरोध में बोलते…

  • कहानियों का वंश फलता-फूलता रहे! – पुस्तक समीक्षा

    कहानियों का वंश फलता-फूलता रहे! – पुस्तक समीक्षा

    लेखिका (किरण जी) की रचना प्रक्रिया से एक हद तक जुड़ा रहा हूं- इस तरह कि आम तौर पर उनकी अमूमन कहानी छपने से पहले पढ़ने को मिल जाती है. पत्रकारिता से जुड़े रहने के कारण हिज्जे व व्याकरण दुरुस्त करना पेशे का हिस्सा रहा है, शायद इस कारण वह भरोसा भी करती हैं- धन्यवाद.…

  • ‘वंदे मातरम’ एक ‘हथियार’ भी है!

    ‘वंदे मातरम’ एक ‘हथियार’ भी है!

    इनके पास धार्मिक/सांप्रदायिक गोलबंदी, या कहें, ‘हिंदुओं का खून खौलने’ के लिए मुद्दों और तरीकों की कमी नहीं है. ये इनका प्रयोग लागातर करते रहते हैं. अब एक ऐसा ही पुराना मुद्दा नये रूप में लाया गया है. ‘वंदे मातरम’ गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर देशव्यापी समारोह! शायद याद हो, कुछ वर्ष पहले…

  • अठारह महीने बनाम ग्यारह साल!

    अठारह महीने बनाम ग्यारह साल!

    आधी सदी पहले देश पर थोपे गये आपातकाल पर विमर्श में यदि स्पष्ट विभाजन नजर आ रहा है, तो यह अकारण नहीं है! सत्ता पक्ष ने इस बार भी एक कर्मकांड की तरह इसका आयोजन ‘सविधान हत्या दिवस’ के रूप में किया. इंदिरा गांधी ने कैसे संविधान को स्थगित कर, लोकतंत्र को कुचल कर सारे…

  • महज शादी के लिए धर्मांतरण, कोई शोर नहीं!

    महज शादी के लिए धर्मांतरण, कोई शोर नहीं!

    दो ‘हिंदुओं’ ने महज शादी के लिए इस्लाम ग्रहण कर लिया, मगर गुपचुप. समाज की नजरों में ‘हिंदू बने रहे. धर्मांतरण के विरोधियों और इसलाम से चिढ़ने वालों को कोई कष्ट नहीं हुआ! मामला धर्मेंद्र और हेमा मालिनी से जुड़ा है. ये किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. भारतीय हिंदी फिल्म जगत के बीते दिनों…