शालडूंगरी का सपना घायल भर हुआ है, लड़ाई अभी बाकी है…
लेखक मनोज भक्त पत्रकार रहे हैं, इसलिए स्वाभाविक ही मीडिया के अंदर के हालात, पत्रकारों व संपादकों के चरित्र, उनकी आपसी प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक पक्षधरता आदि का उपन्यास में बहुत जीवंत चित्रण हुआ है. राजनीति- पक्ष और विपक्ष- में चलने … Read the rest