राजधानी रांची के समाहरणालय स्थित ब्लॉक-बी सभागार में शुक्रवार को करमा पर्व की पूर्व संध्या पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त (DC) मंजूनाथ भजन्त्री और वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) राकेश रंजन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।
समारोह के दौरान समाहरणालय के कर्मियों द्वारा मनमोहक करमा गीत और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए गए। माहौल उस समय और अधिक उत्साहपूर्ण हो गया जब उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री खुद को रोक नहीं पाए और स्वयं मांदर बजाकर अपनी खुशी जाहिर की।
प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम: उपायुक्त
अपने संबोधन में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि झारखंड की संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य और विशेष रूप से पेड़ों व प्रकृति के प्रति लोगों का गहरा लगाव बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि हमें आदिवासी समुदाय से सीखना चाहिए कि वे किस प्रकार प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीवन जीते हैं।
समारोह में उप विकास आयुक्त संजय भगत, सदर अनुमंडल अधिकारी कुमार रजत, ट्रेनी आईएएस आस्था शरण, नगर निगम के अपर प्रशासक संजय कुमार, ITDA परियोजना निदेशक मनीषा तिर्की, जिला परिवहन अधिकारी अखिलेश कुमार और नजारत उप समाहर्ता डॉ. सुदेश कुमार समेत कई अन्य प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।
प्रेस क्लब में सरना समिति का विरोध प्रदर्शन
दूसरी ओर, रांची प्रेस क्लब में केंद्रीय सरना समिति और विभिन्न जनजाति संगठनों ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता का आयोजन किया। समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा और मुख्य पहान जगलाल पहान के नेतृत्व में प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कुछ संस्थाओं द्वारा चर्च में करम देवता का प्रतीक स्थापित कर पारंपरिक पूजा पद्धतियों से छेड़छाड़ की जा रही है।
सरना समिति ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक समुदाय को अपने पर्व-त्योहार मनाने की स्वतंत्रता है, परंतु पारंपरिक रुढ़िवादी प्रथाओं और आस्था के साथ किसी भी प्रकार का संशोधन या गलत चित्रण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस संबंध में समिति ने 16 सितंबर को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
प्रेस वार्ता में जनजाति सुरक्षा मंच के संदीप उरांव, डॉ. बिरसा उरांव, सोमा उरांव, अंजलि लकड़ा और झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति के अध्यक्ष मेघा उरांव समेत कई सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित थे।

Leave a Reply