करम पर्व प्रकृति के साथ जनजातीय समाज के गहरे संबंध का प्रतीक: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार

रांची: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि करम पर्व राज्य की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और प्रकृति के साथ इसके गहरे रिश्ते का प्रतीक है। वे रविवार को बेड़ो में आयोजित ‘करम पर्व पूर्व संध्या समारोह’ को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने पूरे प्रदेशवासियों को करमा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल ने कहा कि करम वृक्ष की डाली की स्थापना, पूजा-अर्चना और सामूहिक नृत्य-संगीत की परंपरा झारखंड की सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। इससे जुड़ी लोककथाएं समाज को अच्छे कर्म, परिश्रम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश देती हैं।

पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक संदेश

राज्यपाल ने वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन से जूझ रही है। ऐसे समय में करम पर्व का प्रकृति के सम्मान और संरक्षण का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। जनजातीय समाज की यह परंपरा प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण की प्रेरणा देती है।

युवा अपनी जड़ों से जुड़ें

झारखंड की भाषाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों और पारंपरिक ज्ञान को अमूल्य धरोहर बताते हुए राज्यपाल ने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने और उनके संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ अपनी संस्कृति से जुड़े रहने से पहचान और अधिक मजबूत होगी।

समग्र विकास और सामाजिक सद्भाव

समारोह के दौरान राज्यपाल ने जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों से अपने अनुभव का लाभ ग्रामीण व वंचित वर्गों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने आगे कहा कि झारखंड की असली ताकत इसकी बहुरंगी संस्कृति और सामाजिक सद्भाव है, जहां विविध समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं और पर्व-त्योहार आपसी भाईचारे को मजबूत करते हैं।