बिना विभागीय अनुमति दूसरी शादी करने वाले कर्मचारियों की दूसरी पत्नी को नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति: झारखंड हाई कोर्ट

झारखंड उच्च न्यायालय ने सरकारी कर्मियों के विवाह और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक अहम कानूनी बिंदु को स्पष्ट किया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक एवं न्यायाधीश राजेश शंकर की युगल पीठ ने निर्णय सुनाया है कि यदि कोई सरकारी सेवक अपनी पहली पत्नी के रहते और विभाग से पूर्व स्वीकृति लिए बिना दूसरा विवाह करता है, तो उसकी मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी अनुकंपा के आधार पर नौकरी की हकदार नहीं होगी।

यह मामला दिवंगत पंचायत सेवक बरनवास मालतु की कथित दूसरी पत्नी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिनकी जुलाई 2011 में सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो गई थी। याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति और सेवानिवृत्ति लाभों में हिस्सेदारी का दावा किया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से संथाली आदिवासी परंपराओं का हवाला देते हुए दूसरी शादी को वैध ठहराने की कोशिश की गई थी।

अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि:

  • सेवा नियमावली की सर्वोच्चता: किसी भी तरह का प्रथागत कानून (Customary Law) सरकारी सेवा के निर्धारित नियमों और बाध्यताओं को निष्प्रभावी नहीं कर सकता।
  • पूर्व अनुमति अनिवार्य: प्रथम पत्नी के जीवित रहते द्वितीय विवाह करने से पूर्व संबंधित विभाग के सक्षम अधिकारी से लिखित मंजूरी लेना अनिवार्य है।
  • वित्तीय लाभों में व्यवस्था: अदालत ने ग्रेच्युटी और सेवानिवृत्ति से जुड़े वित्तीय लाभों में पहली पत्नी तथा दूसरी पत्नी के नाबालिग बेटे का हिस्सा तो तय कर दिया, परंतु अनुकंपा नियुक्ति की राहत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।

एकल पीठ द्वारा दावा खारिज किए जाने के बाद यह अपील खंडपीठ में दाखिल की गई थी, जिसे अदालत ने विचार योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत के इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि सेवा नियमों का उल्लंघन कर किए गए विवाह के मामलों में अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार प्राप्त नहीं किया जा सकता।