गोड्डा/रांची: झारखंड में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान तेज़ हो गई है। गोड्डा ज़िले के महेशटिकरी गाँव में उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब ग्रामीणों को पता चला कि वोटर लिस्ट से उनके नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीण बूथ स्तर के एजेंट (BLA) के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफ़िस (BDO) पहुँच गए।
झारखंड के गोड्डा ज़िले के कुछ बूथों पर एक के बाद एक वोटर के मामले में एक ख़ास पैटर्न सामने आया है। 5 अगस्त को राज्य के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के तहत ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद से ही यह सिलसिला चल रहा है। यहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बूथ लेवल एजेंट (BLA) ‘फ़ॉर्म 7’ का बंडल लेकर पहुँच रहे हैं और ड्राफ़्ट लिस्ट में शामिल वोटरों के नाम हटवाने की मांग कर रहे हैं। इन आवेदनों में से ज़्यादातर नाम अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के हैं।
संवाददाता की जांच से पता चला है कि कम से कम चार बूथों पर बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने इन आवेदनों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। BLO का कहना है कि ये आवेदन या तो असली नहीं थे या फिर प्रक्रिया के हिसाब से सही नहीं पाए गए। BLO राज्य सरकार के कर्मचारी होते हैं, और वर्तमान में राज्य में JMM-कांग्रेस गठबंधन की सरकार है।
दूसरी ओर, BJP ने शिकायत की है कि फ़ॉर्म स्वीकार न करने में BLO की लापरवाही और गलती है। इस मुद्दे ने अब तूल पकड़ लिया है और ज़मीनी स्तर के चुनाव अधिकारियों व BJP कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई है, जो मामला अब मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) तक पहुँच चुका है।
संवाददाता ने उन वोटरों से बात की जिनके नाम हटाने की कोशिश की जा रही थी। पड़ताल में सामने आया कि ये लोग न केवल पीढ़ियों से गाँव में रह रहे हैं, बल्कि इनमें से कई के नाम वर्ष 2003 के गहन संशोधन (इंटेंसिव रिविज़न) के दौरान भी सत्यापित किए गए थे। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, 2003 का सत्यापन मौजूदा SIR प्रक्रिया में नाम बनाए रखने के लिए एक मजबूत आधार होना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर, गोड्डा के महेशटिकरी गांव के बूथ नंबर 9 पर BJP के एक BLA संजीव कुमार रोशन ने वोटरों के खिलाफ ऐसे 25 फ़ॉर्म जमा किए थे। इनमें से आठ वोटरों ने बताया कि उन्हें अपना वोट देने का अधिकार छिन जाने और सरकारी योजनाओं की सूची से नाम कट जाने का डर सता रहा है।
एक अन्य बूथ पर एक BLA 75 फ़ॉर्म लेकर पहुँचा। जब BLO ने फ़ॉर्म के स्रोत और प्रामाणिकता को लेकर सवाल उठाए, तो BLA ने उन सभी 75 फ़ॉर्मों को मौके पर ही आग के हवाले कर दिया।
गोड्डा डिवीज़न के बसंतराय ब्लॉक के BDO श्रीमान मरांडी ने संवाददाता को बताया कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के तौर पर उन्हें चार बूथों—महेशटिकरी, पचुआ किटा, लोचनी और बाघकोल—से शिकायतें मिली थीं। मरांडी ने कहा कि फ़ील्ड वेरिफिकेशन के बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी। उन्होंने बताया कि BLO को इन फ़ॉर्मों पर फ़िलहाल कार्रवाई रोकने का निर्देश दिया गया था “क्योंकि फ़ॉर्म के सही स्रोत का पता नहीं था।” BDO के अनुसार, BLA को नियमानुसार पहले SDO या BDO को लिखित शिकायत देनी चाहिए थी। वहीं, गोड्डा से RJD विधायक संजय प्रसाद यादव ने कहा कि उन्होंने BDO से बात की है और मामले में नियमानुकूल कार्रवाई की जा रही है।
BLO द्वारा उठाई गई आपत्तियां
झारखंड में 30 जून से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के तहत 5 अगस्त को ड्राफ़्ट लिस्ट जारी की गई थी, जिसमें से लगभग 16.48% (तकरीबन 43 लाख) वोटरों के नाम हटाए गए थे। फ़िलहाल दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया जारी है।
नियमानुसार फ़ॉर्म 7 के ज़रिए नाम हटाने की मांग मृत्यु, स्थानांतरण, डुप्लिकेट नाम या भारतीय नागरिक न होने के आधार पर की जाती है। इसके लिए किसी सबूत की तुरंत आवश्यकता नहीं होती, लेकिन आवेदक को एक शपथ-पत्र देना होता है कि दी गई जानकारी झूठी पाए जाने पर दंडनीय कार्रवाई हो सकती है।
महेशटिकरी की BLO अनीशा बानो ने संवाददाता को बताया कि BJP BLA उनके पास लगभग 25 फ़ॉर्म लाए थे जो आधिकारिक तौर पर सही प्रतीत नहीं हो रहे थे। बानो ने बताया कि बाद में BDO के निर्देश पर उन्होंने अमान्य फ़ॉर्म लेने से मना कर दिया। पचुआ किटा के BLO मुख्तार ने भी बताया कि BLA द्वारा लाए गए 75 फ़ॉर्म ब्लॉक ऑफ़िस से जारी फ़ॉर्मों से अलग थे।

ग्रामीणों में डर और अनिश्चितता का माहौल
महेशटिकरी के 70 वर्षीय अब्दुल मन्नान खान कहते हैं, “हम पीढ़ियों से यहाँ रह रहे हैं, 2003 की लिस्ट में भी हमारा नाम था। फिर अचानक हमारे नाम कैसे हटाए जा सकते हैं?” 50 वर्षीय मोहम्मद नौशाद, 80 वर्षीय मोहम्मद शफ़ीक़ और 65 वर्षीय बीबी बासिलन ने भी कागज़ात और खतियान होने के बावजूद अपना नाम कटने और नागरिकता पर सवाल उठने की चिंता जताई।
इसी तरह, दिहाड़ी मज़दूर 65 वर्षीय मोहम्मद असलम, मिर्ज़ा ग़ालिब (61), शमीम (45) और मोहम्मद हसमुद्दीन (60) ने कहा कि वे रोजी-रोटी के लिए बाहर ज़रूर जाते हैं, लेकिन उनका स्थायी निवास, परिवार, आधार कार्ड और ज़मीन-जायदाद सब यहीं झारखंड में ही है।
‘यह हमारी ज़िम्मेदारी का हिस्सा है’: BJP
दूसरी ओर, 27 अगस्त को BJP के झारखंड SIR संयोजक राकेश प्रसाद ने एडिशनल CEO को ज्ञापन सौंपकर साहिबगंज और गोड्डा ज़िलों में SIR प्रक्रिया में “गड़बड़ियों” का आरोप लगाया।
गोड्डा के पूर्व बीजेपी विधायक अमित कुमार मंडल ने संवाददाता के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि BLA द्वारा फ़ॉर्म 7 भरना उनकी चुनावी ज़िम्मेदारी और ट्रेनिंग का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी का नाम दो जगह दर्ज है, तो BLA उस पर आपत्ति उठा सकता है और फ़ॉर्म की संख्या की कोई कानूनी सीमा तय नहीं है। मंडल ने यह भी आरोप लगाया कि BLO को आपत्तिकर्ता BLA और संबंधित व्यक्ति की जानकारी गोपनीय रखनी चाहिए थी, और इसे सार्वजनिक करना ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ का उल्लंघन हो सकता है।

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