रांची: राज्यसभा के पूर्व सांसद और उद्योगपति परिमल नथवानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपने पिछले अनुभवों को साझा करते हुए झारखंड को अपनी “कर्मभूमि” बताया है। उन्होंने एक भावुक पोस्ट और वीडियो साझा कर वर्ष 2008 में पहली बार राज्यसभा सांसद बनने के बाद से लेकर राज्य में जनसेवा और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किए गए कार्यों को याद किया।
“2008 में चुनाव जीतने के बाद झारखंड बना कर्मभूमि”
परिमाल नथवानी ने अपनी पोस्ट में लिखा:
“पहली बार वर्ष 2008 में राज्य सभा चुनाव जीतने के बाद मुझे यह अहसास होने लगा था कि अब झारखंड मेरी कर्मभूमि है। उन्हीं दिनों में इस्लामनगर के लोगों के लिए मैंने अपनी प्रतिबद्धता से जो कुछ थोड़ा बहुत प्रदान किया इससे मुझे झारखंड को मेरी कर्मभूमि कहना सार्थक प्रतीत होता दिखाई दिया।”
उन्होंने इसके साथ ही इस्लामनगर (रांची) में विस्थापितों और जरूरतमंदों के पुनर्वास/आवास निर्माण से जुड़ा एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उनके सांसद फंड और निजी प्रयासों से किए गए कार्यों की झलक दिखाई गई है।

झारखंड से राज्यसभा सांसद के रूप में दो कार्यकालों की मुख्य बातें
परिमाल नथवानी 2008 से 2020 तक लगातार दो कार्यकालों के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में झारखंड से राज्यसभा सांसद रहे:
प्रथम कार्यकाल (2008 – 2014):
वर्ष 2008 में पहली बार झारखंड से राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद, नथवानी ने राज्य में बुनियादी सुविधाओं के विकास पर जोर दिया। उन्होंने रांची के इस्लामनगर में गरीब परिवारों के लिए आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
द्वितीय कार्यकाल (2014 – 2020):
2014 में दोबारा राज्यसभा पहुंचने के बाद उन्होंने सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) के तहत गांवों को गोद लिया और वहां सड़कें, सौर ऊर्जा, स्कूल और सामुदायिक भवन बनवाए। इसके अलावा, राज्य में खेलकूद, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास के मुद्दों को उन्होंने संसद में प्रमुखता से उठाया।
विकास और जनसेवा की मिसाल
परिमाल नथवानी का कार्यकाल केवल संसदीय बहसों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने अपनी सांसद निधि (MPLAD) का अधिकतम उपयोग झारखंड के दूर-दराज के इलाकों और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किया। राज्यसभा में अपने कार्यकाल के बाद भी झारखंड के साथ उनका लगाव और जुड़ाव बना रहा। अब एक बार फिर से वह झारखंड से ही राज्यसभा के सांसद चुने गये हैं। खास-खास अवसरों पर वह अपने संदेशों और सामाजिक कार्यों के जरिए स्थानीय आबादी की भावनाओं के साथ जुड़ते रहते हैं।
पहली बार वर्ष 2008 में राज्य सभा चुनाव जीतने के बाद मुझे यह एहसास होने लगा था कि अब झारखंड मेरी कर्मभूमि है। उन्हीं दिनों में इस्लामनगर के लोगों के लिए मैंने अपनी प्रतिबद्धता से जो कुछ थोड़ा बहुत प्रदान किया इससे मुझे झारखंड को मेरी कर्मभूमि कहना सार्थक प्रतीत होता दिखाई दिया।… pic.twitter.com/jClz96qRb8
— Parimal Nathwani (@mpparimal) August 13, 2026

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