बिहार की राजधानी पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का गुस्सा सड़कों पर उग्र रूप में फूट पड़ा। हजारों की संख्या में छात्र ऐतिहासिक गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास और राजभवन के घेराव के लिए निकले, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें लाठीचार्ज और वाटर कैनन (पानी की बौछार) का जमकर इस्तेमाल हुआ। इस दौरान कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हो गए।
छात्रों की मुख्य मांगें और आंदोलन का कारण
यह व्यापक प्रदर्शन पिछले कई दिनों से गर्दनीबाग में चल रहे छात्रों के धरने का ही उग्र विस्तार है। छात्रों और विभिन्न संगठनों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
• 70वीं BPSC परीक्षा रद करना: परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में इसे तत्काल रद करने की मांग।
• TRE-4 (शिक्षक नियुक्ति) में सुधार: शिक्षक भर्ती परीक्षा को दो चरणों के बजाय सिंगल-स्टेज (एकल चरण) में आयोजित करने, नेगेटिव मार्किंग हटाने और 100% डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग।
• नियमित परीक्षा कैलेंडर: BSSC और अन्य आयोगों द्वारा समय पर परीक्षाएं कराने तथा वार्षिक कैलेंडर जारी करने की मांग।
डाकबंगला चौराहे पर बवाल और वाटर कैनन का रोमांच
गांधी मैदान से मार्च शुरू होने के बाद पुलिस ने जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे पर भारी सुरक्षा घेराबंदी की थी। जब उग्र छात्रों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए वाटर कैनन का प्रयोग किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों का अलग ही अंदाज भी दिखा, जहां पानी की बौछार के बीच कुछ छात्र शैंपू लगाकर नहाते और झूमते नजर आए। हालांकि, इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्षों के बीच झड़प के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पथराव में टाउन डीएसपी सहित कई पुलिसकर्मी और छात्र चोटिल हुए, वहीं पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया।
विवादित बयान और सरकार का एक्शन
आंदोलन को भड़काने में एक दिन पहले BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह द्वारा दिए गए उस विवादित बयान ने मुख्य भूमिका निभाई, जिसमें उन्होंने छात्रों के आंदोलन पर एक आपत्तिजनक कहावत का प्रयोग किया था। छात्रों के भारी आक्रोश और विपक्ष के तीखे हमलों के बाद, सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए परीक्षा नियंत्रक को सस्पेंड कर दिया।
सरकार की पहल और प्रशासनिक संवाद
बढ़ते दबाव के बीच, प्रशासन ने छात्र प्रतिनिधियों के साथ मुख्य सचिव स्तर पर बातचीत की। सरकार ने युवाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हर महीने ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ (Student Support Camps), एक समर्पित हेल्पलाइन (1100) और ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ शुरू करने की घोषणा की है। जहां एक ओर सरकार लगातार संवाद और समाधान की बात कह रही है, वहीं छात्र अपनी मांगों पर पूरी तरह डटे हुए हैं।

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