Sonam Wangchuk ने केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच हाल ही में हुई बातचीत को “सकारात्मक कदम” बताया है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि क्षेत्र में भरोसे की बहाली का काम अभी अधूरा है। उन्होंने कहा कि पिछले आंदोलनों से जुड़े कई मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले, निजी उपकरणों की ज़ब्ती और आंदोलन से जुड़े संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है।
गृह मंत्रालय (MHA) की उप-समिति के साथ हाल में हुई बैठक के बाद PTI को दिए इंटरव्यू में वांगचुक ने कहा कि गुरुवार की बातचीत से उनके दृष्टिकोण में कुछ बदलाव आया है, हालांकि वे अब भी सतर्क हैं। उन्होंने कहा, “इस बैठक से कुछ फर्क पड़ा है, वरना मैं काफी निराश था।”
वांगचुक ने आरोप लगाया कि बीते कुछ समय में लद्दाख के भीतर सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ा है। उनके अनुसार, लेह और कारगिल में विभाजन की स्थिति बन रही थी और समुदायों के बीच टकराव बढ़ रहा था। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हो रहे थे कि उन्हें डर था कि लद्दाख भी मणिपुर जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के साथ हालिया बातचीत से कुछ राहत मिली है और दोनों पक्षों ने “एक कदम आगे बढ़ाया” है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि भरोसा तभी मजबूत होगा जब आने वाले हफ्तों में सरकार ठोस कदम उठाएगी।
वांगचुक ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान जब उन्हें हिरासत में लिया गया था, तब उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया था, जो अब तक वापस नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं के दौर में बिना फोन के उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “सरकार ने मुझे आधा आज़ाद किया है और बाकी आधा जेल में रखा है।”
उन्होंने Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh (HIAL) से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। वांगचुक के अनुसार, संस्थान की जमीन का पट्टा रद्द कर दिया गया और उसका FCRA लाइसेंस अब तक बहाल नहीं किया गया है, जबकि खातों की जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी चिंता 24 सितंबर के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज आपराधिक मामलों और आंदोलन के दौरान हुई मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक इन मामलों को वापस नहीं लिया जाता और प्रभावित लोगों को न्याय नहीं मिलता, तब तक विश्वास बहाल होना मुश्किल होगा।
गौरतलब है कि Leh Apex Body और Kargil Democratic Alliance के प्रतिनिधियों ने हाल ही में गृह मंत्रालय की उप-समिति के साथ लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा, लोकतांत्रिक अधिकारों और शासन व्यवस्था पर चर्चा की थी। दोनों संगठन लंबे समय से लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा, जमीन और नौकरियों की सुरक्षा तथा अधिक लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने संकेत दिया कि लद्दाख में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने और अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संवैधानिक सुरक्षा देने को लेकर “सैद्धांतिक सहमति” बनी है।

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