शिक्षक दिवस की नष्ट होती महत्ता


पिछले सप्ताह पूरे देश में शिक्षक दिवस (5 सितंबर) मनाया गया। विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। गुरु की महिमा के महत्व पर प्रकाश डाला गया। आज के बदलते दौर में, डिजिटल माध्यमों ने शिक्षा को सुगम, सरल और प्रभावी बना दिया है, पर इसका ज्ञान भी गुरु ही देता है। शिक्षक पढ़ाई के साथ अपने चरित्र एवं गतिविधियों से बच्चों को जीने की कला भी सिखाते हैं। वे कुम्हार की तरह शिष्य रुपी घड़े को आकार देते हैं।
लेकिन आज कुछ शिक्षक अपने कुकृत्य एवं कुत्सित व्यवहार के कारण इस क्षेत्र को कलंकित करने का काम कर भी कर रहे हैं। बक्सर( बिहार) के एक मध्य विद्यालय के शिक्षकों ने छात्राओं और अभिभावकों के विश्वास को तोड़ने के साथ ही इंसानियत को भी तार- तार किया है। गुरु की मर्यादा को तोड़ा है।

पिछले सप्ताह पूरे देश में शिक्षक दिवस (5 सितंबर) मनाया गया। विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। गुरु की महिमा के महत्व पर प्रकाश डाला गया। आज के बदलते दौर में, डिजिटल माध्यमों ने शिक्षा को सुगम, सरल और प्रभावी बना दिया है, पर इसका ज्ञान भी गुरु ही देता है। शिक्षक…


सितंबर माह के आरंभ में डुमरा प्रखंड के मध्य विद्यालय के दो शिक्षक- अरविंद कुमार और वीरेंद्र प्रसाद ने 12 नाबालिक छात्राओं के साथ दुष्कर्म तो किया ही, उसका वीडियो बनाकर नेट पर वायरल भी कर दिया। यह घिनौना खेल कई महीनों से चल रहा था। लड़कियों को होटल भी ले जाया जाता था। जब वीडियो को वहां के लोगों ने देखा, तब घटना की जानकारी मिली। ग्रामीण विद्यालय जाकर शिक्षकों को खूब पीटा एवं गिरफ्तारी के लिए थाना में जमा हुए। जिला शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षकों को निलंबित कर दिया। प्राचार्य को भी गिरफ्तार किया गया है। वीडियो, छात्रों एवं अभिभावकों के बयान के बाद पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन ने कानूनी और पास्को एक्ट के तहत कार्रवाई करने की बात कही है। होटल का कमरा सील कर दिया गया है। फॉरेंसिक जांच के लिए सैंपल इकट्ठा कर ले किया गया है। होटल मालिक की संलिप्तता मानते हुए उसे भी गिरफ्तार किया है।
स्कूल – कॉलेज में पढ़ने वाली नाबालिग लड़कियां अपने सपनों, भविष्य के विषय में सोचती हैं, ऊंची उड़ानों की कल्पना करती है। ऐसे में दुष्कर्म की घटना उसे झकझोर कर रख देती है, अंदर तक तोड़ देती है। वे पूरी जिंदगी एक खौफनाक मंजर के साथ जीने को विवश होती हैं।
उपरोक्त घटनायें हाल की हैं पर इसके पूर्व भी महिलाओं एवं नाबालिग लड़कियों पर यौन शोषण, दुष्कर्म होता रहा हैं।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र के एक कन्या छात्रावास में नाबालिक बच्चियों के साथ स्कूल के शिक्षक और चौकीदार लगातार शारीरिक शोषण करते रहें। मामला सामने आया तो जांच कमिटियां बैठी। कभी आवासीय विद्यालय की किशोरी के गर्भवति होने का समाचार भी आता रहता है। इसके विरोध में धरना, प्रदर्शन भी लिए गए हैं। निर्भया कांड को कौन भूल सकता है? उसके बाद गठित वर्मा आयोग ने कई सिफारिशें की। महिलाओं के मन से डर पैदा करने वाली स्थितियों को सुधारने की दिशा में प्रयास किया गया। सड़क किनारे बिजली लगाने, सखी केंद्र, वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, पीड़िता को मुआवजा इत्यादि के लिए फंड की व्यवस्था भी की गई। कई परियोजनाओं के लिए राशि भी आवंटित किए गए। लेकिन दुर्भाग्य कि पुरुषवादी सोच और समझदारी के अभाव में राशि का इस्तेमाल नहीं हो पाता। न उन्हें सुरक्षित माहौल मिल पाता है और न ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग पाता है।
ऐसे माहौल में शिक्षक दिवस मनाना अर्थहीन लगने लगता है.

  • कुमुद. साभार: संभवा इंजोर

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