रांची के ट्यूलिप हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित: भारी-भरकम बिल, मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में स्वास्थ्य विभाग का कड़ा एक्शन

रांची: राजधानी रांची के रिंग रोड स्थित तिलता चौक के पास संचालित ट्यूलिप हॉस्पिटल (Tulip Hospital) भारी वित्तीय अनियमितताओं, मरीज के परिजनों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में घिर गया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के कड़े निर्देशों के बाद, रांची सिविल सर्जन ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट के तहत ट्यूलिप हॉस्पिटल का पंजीकरण और लाइसेंस तत्काल प्रभाव से अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया है।

मुख्य विवाद और घटना
यह पूरा मामला लातेहार से आए एक सड़क दुर्घटना के गंभीर मरीज के इलाज से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, 8 सितंबर को भर्ती किए गए मरीज के ब्रेन ऑपरेशन का शुरुआती खर्च करीब 80,000 रुपये बताया गया था, लेकिन महज दो दिनों के भीतर अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें 2 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल थमा दिया।

बिल और बकाया राशि को लेकर 10 सितंबर 2026 को अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच तीखी नोकझोक हुई। परिजनों ने गंभीर आरोप लगाया कि अस्पताल कर्मियों ने सीसीटीवी कैमरे बंद करके उनके साथ मारपीट की, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और उनके मोबाइल फोन भी छीन लिए।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और पाबंदियां
घटना के तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

नई सेवाओं पर रोक: निलंबन के बाद अस्पताल में नए ओपीडी पंजीकरण, नए मरीजों की भर्ती और नई इलेक्टिव सर्जरी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। हालांकि, अस्पताल में पहले से भर्ती मरीजों का इलाज जारी रखने का निर्देश दिया गया है।

साक्ष्य सुरक्षित रखने के आदेश: 10 सितंबर की घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, केस शीट, मेडिकल रिकॉर्ड, सहमति पत्र और ड्यूटी रोस्टर को बिना किसी छेड़छाड़ के सुरक्षित रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। साक्ष्यों के साथ खिलवाड़ करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

उच्च स्तरीय जांच: स्वास्थ्य मंत्री ने विभाग के अपर मुख्य सचिव को तत्काल एक विशेष जांच कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है, जो पूरे मामले की गहराई से जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपेगी।

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
दूसरी ओर, ट्यूलिप हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि लातेहार के सड़क दुर्घटना के मरीज की स्थिति बेहद नाजुक थी और डॉक्टरों ने उसकी सफल ब्रेन सर्जरी की थी। प्रबंधन के मुताबिक, इलाज का कुल बिल 1.70 लाख रुपये था, जिसमें से परिजन 1 लाख रुपये का भुगतान पहले ही कर चुके थे, और 2 लाख से अधिक की वसूली के आरोप बेबुनियाद हैं। निलंबन आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें केवल कारण बताओ नोटिस मिलने की बात पता चली थी, लेकिन विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए उन्होंने नई मरीजों की भर्ती और ओपीडी सेवाएं तुरंत रोक दी हैं।

स्वास्थ्य मंत्री का सख्त संदेश
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी निजी अस्पताल द्वारा बकाया पैसों के लिए मरीजों या उनके परिजनों को प्रताड़ित करना, बंधक बनाना या बाउंसर रखकर मारपीट करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून सबके लिए बराबर है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।


Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *