रांची: मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रताओं के संरक्षण के लिए कार्यरत संगठन लोक स्वातंत्र्य संगठन (PUCL), झारखंड की ओर से आगामी 23 अगस्त (रविवार) को ‘पांचवीं स्टेन स्मृति व्याख्यानमाला’ का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित व्याख्यान कार्यक्रम रांची के पुरुलिया रोड स्थित SDC (सोशल डेवलपमेंट सेंटर) में दोपहर 3:00 बजे आयोजित होगा।
मुख्य व्याख्यान से पूर्व दोपहर 12:00 बजे एक प्रेस वार्ता (पत्रकार वार्तालाप) का भी आयोजन किया गया है, जिसमें मीडिया प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।
व्याख्यान का विषय: लोकतंत्र, छात्र-युवा और मीडिया
इस वर्ष व्याख्यानमाला का मुख्य विषय “लोकतंत्र का भविष्य, छात्र-युवा आंदोलनों से उभरती संभावनाएं और मीडिया की भूमिका” तय किया गया है।
वर्तमान समकालिक सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए यह विषय अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता देश के वरिष्ठ पत्रकार एवं निर्भीक विश्लेषक श्री शीतल पी सिंह होंगे।
मुख्य वक्ता का परिचय: कौन हैं शीतल पी सिंह?
व्याख्यानमाला के मुख्य अतिथि व वक्ता शीतल पी सिंह भारतीय हिंदी पत्रकारिता के जाने-माने चेहरे हैं।
• पत्रकारिता यात्रा: उन्होंने वर्ष 1984 से पत्रकारिता की शुरुआत की और अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, स्वतंत्र भारत तथा दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में वर्षों तक मुख्यधारा की ग्राउंड रिपोर्टिंग की है।
• डिजिटल व वैकल्पिक मीडिया: वे चर्चित डिजिटल न्यूज़ पोर्टल ‘सत्य हिंदी’ (Satya Hindi) के सह-संस्थापक (Co-founder) हैं।
• पहचान: अपनी तीखी और तथ्यपरक टिप्पणियों के लिए पहचाने जाने वाले शीतल पी सिंह कॉर्पोरेट प्रभाव, सामाजिक न्याय, आर्थिक असमानता और मीडिया की स्वतंत्रता जैसे ज्वलंत मुद्दों पर मुखरता से अपनी राय रखते हैं।
फादर स्टेन स्वामी: एक निर्भीक मानवाधिकार योद्धा की विरासत
यह व्याख्यानमाला दिवंगत फादर स्टेन स्वामी (26 अप्रैल 1937 – 5 जुलाई 2021) की स्मृति में आयोजित की जाती है।
• पृष्ठभूमि एवं कार्य: तमिलनाडु में जन्मे जेसुइट पादरी फादर स्टेन स्वामी ने अपने जीवन के चार दशक से अधिक समय झारखंड और मध्य भारत के आदिवासियों, विस्थापितों और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई में समर्पित कर दिए। उन्होंने संविधान की ‘पांचवीं अनुसूची’ के अनुपालन और जल-जंगल-जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाई।
• संघर्ष और विरासत: वर्ष 2020 में भीमा कोरेगांव मामले के तहत यूएपीए (UAPA) में गिरफ्तारी के समय वे 83 वर्ष के थे। जुलाई 2021 में न्यायिक हिरासत के दौरान उनका निधन हो गया। उनका बहुचर्चित वाक्य — “मैं एक मूक दर्शक नहीं हूं, बल्कि खेल का हिस्सा हूं और इसकी कीमत चुकाने को तैयार हूं” — आज भी नागरिक अधिकारों के आंदोलनों की प्रेरणा बना हुआ है।
कार्यक्रम की रूपरेखा एवं आयोजक
पीयूसीएल (PUCL) की स्थापना लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा नागरिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी।
• प्रेस वार्ता: 23 अगस्त, दोपहर 12:00 बजे (स्थान: SDC, पुरुलिया रोड, रांची)
• मुख्य व्याख्यान: 23 अगस्त, दोपहर 3:00 बजे (स्थान: SDC, पुरुलिया रोड, रांची)
आयोजन समिति की ओर से राज्य अध्यक्ष दीनानाथ पेंटे, महासचिव शशि सागर वर्मा, रांची इकाई के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक झा और ने सभी पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं युवाओं से इस कार्यक्रम में सहभागिता की अपील की है।

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