रांची, 20 जुलाई 2026: झारखंड में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए दो बड़े थर्मल पावर परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इनमें कोडरमा थर्मल पावर परियोजना के दूसरे चरण में 800-800 मेगावाट की दो नई इकाइयों तथा पतरातु थर्मल पावर परियोजना में 800 मेगावाट की तीसरी इकाई का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर राज्य को कुल 2,400 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता प्राप्त होगी।
यह जानकारी केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक ने सोमवार को राज्यसभा में झारखंड से सांसद श्री परिमल नथवानी द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
मंत्री ने बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान झारखंड में कुल 2,780 मेगावाट क्षमता वाली नई थर्मल पावर परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें नॉर्थ करणपुरा सुपर थर्मल पावर स्टेशन की 660-660 मेगावाट की तीन इकाइयां तथा पतरातु थर्मल पावर परियोजना की 800 मेगावाट क्षमता वाली पहली इकाई शामिल है।
राज्यसभा सांसद श्री परिमल नथवानी ने सरकार से पिछले पांच वर्षों में झारखंड में शुरू की गई, निर्माणाधीन तथा स्वीकृत नई थर्मल पावर परियोजनाओं की संख्या और उनकी क्षमता संबंधी जानकारी मांगी थी।
सरकार के अनुसार, कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन का विकास दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (डीवीसी) द्वारा किया जा रहा है, जो केंद्र सरकार तथा झारखंड एवं पश्चिम बंगाल सरकारों की संयुक्त स्वामित्व वाली कंपनी है। वहीं, पतरातु विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) पतरातु परियोजना की तीसरी इकाई का निर्माण कर रहा है। यह एनटीपीसी लिमिटेड और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) का संयुक्त उपक्रम है।
ऊर्जा राज्य मंत्री ने अपने उत्तर में यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार बिजली उत्पादन की बढ़ती आवश्यकता और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार, उसके उपयोग को बढ़ावा तथा विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 31 मई 2026 तक देश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 53.75 प्रतिशत हो चुकी है।
मंत्री ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कुसुम योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल आधारित राष्ट्रीय कार्यक्रम, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन), धरती आभा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जेजीयूए), राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए विजिबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) तथा आदिवासी एवं पीवीटीजी बस्तियों के लिए नई सौर ऊर्जा योजनाओं सहित कई महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किए हैं।
सरकार का कहना है कि थर्मल और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के संतुलित विकास के माध्यम से देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में भी निरंतर कार्य किया जा रहा है।

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