आंसू गैस के गोलों के बीच सरकार झुकी, जेपी नड्डा से वार्ता, अस्पताल से वांगचुक की हुंकार!

नई दिल्ली, 20 जुलाई 2026 (शाम 8:00 बजे): नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक, परीक्षाओं में धांधली और छात्रों की आत्महत्याओं के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली आज एक अभूतपूर्व छात्र आंदोलन और ऐतिहासिक राजनीतिक सत्याग्रह की गवाह बनी। इंटरनेट से उपजे और युवाओं के बीच लोकप्रिय हो चुके ‘कॉक्रोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले आज देश भर से आए हजारों छात्रों और युवाओं ने दिल्ली की सड़कों पर ‘संसद चलो’ मार्च के आह्वान के साथ भारी प्रदर्शन किया।
प्रशासन द्वारा धारा 144 लगाने, बैरिकेडिंग करने और इंटरनेट सेवाओं को आंशिक रूप से बाधित करने के बावजूद युवाओं का आक्रोश कम नहीं हुआ। जंतर-मंतर पर पुलिस के साथ तीखी झड़पें हुईं, जहां प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया। कई छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है।
नड्डा आवास पर CJP की हाई-प्रोफाइल बैठक: सरकार ने बढ़ाया बातचीत का हाथ
सड़कों पर बढ़ते जनसैलाब और भारी दबाव के बीच आखिरकार केंद्र सरकार को झुकना पड़ा और प्रदर्शनकारियों को बातचीत का न्योता दिया गया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने अपने आवास पर CJP के प्रतिनिधिमंडल के साथ करीब 4 घंटे तक गहन मौखिक चर्चा की।
• प्रतिनिधिमंडल: CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने जेपी नड्डा से मुलाकात की।
• CJP की मुख्य मांगें: प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री को एक आधिकारिक मांग पत्र सौंपा। इसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक से प्रभावित होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ (10 मिलियन रुपये) का मुआवजा देने और हिरासत में लिए गए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग शामिल है।
• सरकार का रुख: बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बयान जारी कर कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने CJP नेताओं से तत्काल अपना धरना-प्रदर्शन (Sit-in) समाप्त करने की अपील की है। नड्डा ने भरोसा दिलाया कि वे इन मांगों को लेकर सरकार के भीतर उचित स्तर पर आंतरिक रूप से चर्चा करेंगे।
• CJP की चेतावनी: CJP प्रवक्ता सौरव दास ने साफ किया कि जब तक सरकार की ओर से उनकी जायज मांगों पर ठोस लिखित आश्वासन या कार्रवाई नहीं होती, तब तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन और देशव्यापी नागरिक सत्याग्रह जारी रहेगा।
सफदरजंग अस्पताल से सोनम वांगचुक का बड़ा संदेश: “यह दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन है”
दूसरी ओर, लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और छात्रों के इस आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल में रखा गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए सरकार से नई मेडिकल रिपोर्ट मांगी है।
अस्पताल के भीतर से ही अपनी पत्नी गीतांजलि जे आंगमो के जरिए जारी किए गए एक हस्तलिखित पत्र में वांगचुक ने इस छात्र और युवा आंदोलन को ‘भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन’ करार दिया है। उन्होंने अपनी इस स्थिति को “अवैध हिरासत” बताते हुए कहा कि यह देश को “अन्याय और भय से मुक्ति” दिलाने की लड़ाई है और वे अस्पताल के भीतर भी अपना उपवास जारी रखेंगे।
शाम तक जंतर-मंतर और दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल मुस्तैद हैं, और पूरे देश की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार युवाओं के इस ‘कॉक्रोच आंदोलन’ के आगे पूरी तरह झुकती है या गतिरोध और गहराता है।