जंतर-मंतर पर फिर गरजा छात्र आंदोलन, CJP ने सरकार पर बढ़ाया दबाव

नई दिल्ली, 30 जुलाई। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर गुरुवार को एक बार फिर छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का जमावड़ा देखने को मिला। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया और हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए पुलिस कार्रवाई की जा रही है। वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन अब केवल परीक्षा संबंधी अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई बन चुका है।

इस बीच दिल्ली सरकार ने 20 जुलाई को आयोजित “चलो संसद” प्रदर्शन में शामिल अधिकांश CJP समर्थकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

उधर, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों का खंडन किया है जिनमें कहा जा रहा था कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए बंद कर दिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि निर्धारित नियमों के तहत जंतर-मंतर पहले की तरह विरोध-प्रदर्शनों के लिए उपलब्ध है।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्र आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें आंदोलन के कारण धमकियां मिल रही हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जंतर-मंतर पर लगातार हो रहे प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि छात्र संगठनों का आंदोलन अभी थमता नहीं दिख रहा। आगामी दिनों में संसद के मानसून सत्र के दौरान भी इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव तेज होने की संभावना है।