26 साल बाद भी अधूरा झारखंड का सपना: आंदोलनकारियों ने जताई नाराजगी, नए युवा नेतृत्व के निर्माण का आह्वान

रांची, 30 जुलाई। झारखंड राज्य गठन के 26 वर्ष पूरे होने के बावजूद राज्य के मूल उद्देश्यों और जन आकांक्षाओं के अधूरे रहने पर गुरुवार को रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में झारखंड आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवा प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण चिंतन बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य के विकास की दिशा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए झारखंड के मूल मुद्दों को लेकर नए जनआंदोलन और युवा नेतृत्व तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

बैठक का आयोजन झारखंड अलग राज्य आंदोलन के प्रमुख अगुआ, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के संस्थापक एवं तत्कालीन महासचिव तथा पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने किया। बैठक में झारखंड आंदोलन के वरिष्ठ साथी डॉ. संजय बसु मल्लिक सहित कई पुराने आंदोलनकारी शामिल हुए। वहीं नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता नौशाद खान, लेखक ग्लैडसन डुंगडुंग, सुबोध डांगी तथा बिहार से आईं महिला सामाजिक कार्यकर्ता समेत अनेक युवा कार्यकर्ताओं ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड बनने के बाद अब तक राज्य में 14 मुख्यमंत्री और 14 सरकारें बदल चुकी हैं, लेकिन इससे न तो झारखंड की तस्वीर बदली और न ही यहां के लोगों की तकदीर। उनका कहना था कि अलग राज्य आंदोलन के दौरान जिन सपनों और अपेक्षाओं के साथ झारखंड का गठन हुआ था, वे आज भी अधूरे हैं और राज्य की आम जनता को उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है।

चर्चा के दौरान स्थानीय नीति, नियोजन नीति और आरक्षण नीति के स्थायी समाधान नहीं निकल पाने पर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आदिवासी एवं मूलवासी अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों का भी प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ है। बैठक में पेसा अधिनियम, 1996, समता निर्णय, 1997 तथा वन अधिकार अधिनियम, 2006 को पूरी तरह लागू नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया। साथ ही छोटानागपुर काश्तकारी (CNT) अधिनियम, 1908 और संथाल परगना काश्तकारी (SPT) अधिनियम, 1949 के कथित उल्लंघनों पर भी चिंता व्यक्त की गई।

बैठक में मौजूद वक्ताओं का मत था कि झारखंड के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विमर्श को फिर से जनता के बीच ले जाने की आवश्यकता है। इसके लिए राज्यभर में संवाद अभियान चलाने, युवाओं को संगठित करने तथा झारखंड आंदोलन की मूल भावना के अनुरूप नए वैचारिक और जनपक्षधर नेतृत्व के निर्माण की दिशा में कार्य करने पर सहमति बनी।

बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि झारखंड के बुनियादी सवालों, संवैधानिक अधिकारों तथा राज्य के संसाधनों पर स्थानीय समुदायों के अधिकारों को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा। साथ ही आंदोलन के पुराने और नए साथियों को एक साझा मंच पर लाकर भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी।

नोट (संपादकीय): समाचार में उल्लिखित आरोप और दावे बैठक में वक्ताओं द्वारा व्यक्त विचारों पर आधारित हैं। इन पर संबंधित सरकार या अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया समाचार में उपलब्ध नहीं है।


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