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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 की मतगणना के 15वें दौर तक छात्र राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिला है। इस बार उपाध्यक्ष पद के मुकाबले में किसी बड़ी पार्टी का टिकट न होने के बावजूद निर्दलीय प्रत्याशी दीपांशु शौकीन ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों पर मजबूत बढ़त बना ली है।
वोटों का गणित:
15वें राउंड की गिनती पूरी होने तक दीपांशु शौकीन को कुल 22,682 वोट हासिल हुए हैं। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवार ईशु मौर्य 11,670 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के प्रत्याशी वीर चतरथ को महज 3,273 वोट मिले हैं।
NSUI से बगावत कर मैदान में उतरे:
दीपांशु की यह बढ़त इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शुरुआत में वे NSUI की ओर से ही उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार थे और उन्होंने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया था। हालांकि, अंतिम समय में कांग्रेस के एक नेता के बेटे को प्राथमिकता देते हुए संगठन ने उनसे नाम वापस लेने को कहा। दीपांशु ने इस फैसले को स्वीकार न करते हुए बतौर निर्दलीय प्रत्याशी ही चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और चर्चित आंदोलन:
दिल्ली के पीरागढ़ी गांव से आने वाले दीपांशु के पिता बस कंडक्टर हैं और माता आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। वे डीयू के बुद्धिस्ट स्टडीज विभाग से पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि स्नातक की डिग्री उन्होंने शहीद भगत सिंह कॉलेज से ली है। सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद छात्रों को न्याय दिलाने के लिए नंगे पैर रहने के अपने संकल्प के बाद से वे छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हुए।
UPSC के बजाय चुना छात्र राजनीति का रास्ता:
चुनावी अभियान के दौरान उन्हें आम आदमी पार्टी की छात्र शाखा (ASAP) से जुड़ने का न्योता मिला और जाट बहुल समीकरणों को लेकर एबीवीपी उम्मीदवार के साथ समझौते की भी चर्चाएं उठीं, लेकिन उन्होंने सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया। उनके परिजन चाहते थे कि वे यूपीएससी (UPSC) परीक्षा की तैयारी कर सिविल सेवा में जाएं, लेकिन उन्होंने ज़मीनी स्तर पर काम करने के लिए छात्र राजनीति की राह को चुना।

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