नई दिल्ली/रांची: भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण” (18–19 सितंबर) में झारखंड के वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के आर्थिक हितों और अधिकारों की बात प्रमुखता से रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए दलीय राजनीति से ऊपर उठकर आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग देना अनिवार्य है।
सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (विज्ञप्ति संख्या – 106/2026, दिनांक – 19/09/2026) के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्री और देश भर के राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों की उपस्थिति में आयोजित इस सम्मेलन में झारखंड के वित्त मंत्री ने एक समतामूलक और सशक्त समाज के निर्माण पर जोर दिया।
केंद्र सरकार से तीन प्रमुख मांगें:
झारखंड के वित्त मंत्री ने सम्मेलन में राज्य के वित्तीय अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार के समक्ष तीन मुख्य मांगें रखीं:
खनन पर सेस (Cess) लगाने का अधिकार: राज्यों के खनन पर सेस लगाने के अधिकार की पुनर्बहाली की जाए।
जीएसटी क्षतिपूर्ति: जीएसटी लागू होने से राज्यों को हुई राजस्व क्षति की भरपाई की जाए।
जी-राम-जी योजना: जी-राम-जी योजना में केंद्र और राज्य का 90:10 का वित्तीय अनुपात बहाल किया जाए।
‘राज्यों के सशक्त होने से ही विकसित बनेगा भारत’
अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र की कुछ नीतियों और खनिज क्षेत्र में संशोधनों के कारण झारखंड को लगभग 20,000 से 22,000 करोड़ रुपये तक की संभावित आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद झारखंड का वित्तीय प्रदर्शन बेहतर रहा है और राज्य नीति आयोग की ‘अचीवर’ (Achiever) श्रेणी में शामिल है। राज्य का राजस्व संग्रह मजबूत है, राजकोषीय घाटा नियंत्रित है और पूंजीगत व्यय उच्च स्तर पर बना हुआ है।
उन्होंने कृषि, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में वित्तीय आवंटन बढ़ाने की वकालत करते हुए कहा कि देश की 70% आबादी गांवों में रहती है, इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किए बिना ‘विकसित भारत’ का सपना अधूरा रहेगा।
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल रहा मौजूद:
इस दो दिवसीय उच्चस्तरीय सम्मेलन में झारखंड के वित्त मंत्री के साथ राज्य का प्रशासनिक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा, जिसमें वित्त सचिव श्री प्रशांत कुमार, अपर सचिव श्री कर्ण सत्यार्थी, संयुक्त सचिव श्री चन्द्रभूषण प्रसाद, माननीय मंत्री के आप्त सचिव श्री अनिरबान आईच और श्री नरेन्द्र कुमार शामिल रहे।

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