बंगाल में चुनावी संग्राम: ममता का इस्तीफे से इनकार, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर उठते सुलगते सवाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में गंभीर राजनीतिक संकट और संवैधानिक विवाद की स्थिति बनी हुई है। 5 मई 2026 को घोषित परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड जीत हासिल की है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा है। यहाँ पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा दी गई है:

ममता बनर्जी का इस्तीफा देने से इनकार
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने इन नतीजों को “अनैतिक जीत” और “साजिश” करार दिया है। ममता बनर्जी का दावा है कि वह चुनाव में हारी नहीं हैं, बल्कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने मिलकर उन्हें हरवाया है। उन्होंने घोषणा की है कि वे अब सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगी।

सुप्रीम कोर्ट और मीडिया कर्मियों के बीच विवाद
मीडिया कर्मियों की नाराजगी: मीडिया जगत में चर्चा है कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं पर जिस तरह से सुनवाई की, वह विवादास्पद रहा। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट को ऐसी “चुनावी वारफेयर” वाली याचिकाओं पर दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए जो केवल समय बर्बाद करने के लिए डाली जाती हैं।

एसआईआर में 27लाख मतदाताओं का नाम हटाये जाने संबंधी मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट का यह बयान भी खूब विवाद में है जिसमें कहा गया कि जो लोग वोट देने से वंचित रह गये हैं अगली बार वोट दे देंगे।

  • संवैधानिक संकट: बहुमत के बावजूद ममता का कड़ा रुख।
  • न्यायपालिका बनाम मीडिया: सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर बहस।
  • विपक्ष की एकजुटता: राहुल, अखिलेश और केजरीवाल का समर्थन।
  • SIR विवाद: प्रशांत भूषण के मतदाता सूची में गड़बड़ी के गंभीर आरोप।

सुप्रीम कोर्ट का रुख: कोर्ट ने टीएमसी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मतगणना केंद्रों पर राज्य कर्मचारियों के बजाय केवल केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है और चुनाव प्रक्रिया में दखल देना कोर्ट का काम नहीं है।

ममता और प्रशांत भूषण के आरोप
प्रशांत भूषण का दावा: वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने विशेष गहन संशोधन (SIR) के माध्यम से बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से नाम हटाए हैं, खासकर एक विशिष्ट समुदाय (मुस्लिम) को निशाना बनाया गया है। उन्होंने इसे “बेईमान और अवैध” प्रक्रिया बताया।

ममता बनर्जी के आरोप: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को “बीजेपी आयोग” बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 100 से अधिक सीटों पर बीजेपी ने “लूट और धोखाधड़ी” की है और केंद्रीय बलों का दुरुपयोग किया गया है।

विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया (INDIA गठबंधन)
चुनाव नतीजों के बाद विपक्षी नेताओं ने ममता बनर्जी के साथ एकजुटता दिखाई है:
राहुल गांधी और सोनिया गांधी: उन्होंने ममता बनर्जी को फोन कर समर्थन का भरोसा दिलाया है। राहुल गांधी ने भी चुनावी नतीजों और बीजेपी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
अखिलेश यादव: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ममता से मिलने कोलकाता जा रहे हैं और उन्होंने इस लड़ाई में साथ रहने का वादा किया है।
अरविंद केजरीवाल: केजरीवाल ने SIR प्रक्रिया को मोदी सरकार का “चुनावी हथियार” बताया और कहा कि बंगाल के लोगों ने इसके खिलाफ वोट किया था, फिर भी नतीजे प्रभावित किए गए।

असम, केरल और तमिलनाडु का संदर्भ
2026 के इन विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन दक्षिण और पूर्वोत्तर में भी चर्चा का विषय रहा है। जहाँ बंगाल में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, वहीं विपक्षी नेता इसे लोकतंत्र के लिए खतरे के रूप में देख रहे हैं। सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल की जीत के बाद अब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव को चुनौती देने का ऐलान किया है।

इस पूरी स्थिति ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की सीमा और केंद्र-राज्य संबंधों पर एक नई बहस छेड़ दी है। ममता बनर्जी ने फिलहाल राजभवन जाकर इस्तीफा देने से मना कर दिया है, जिससे एक संवैधानिक गतिरोध (Constitutional Deadlock) पैदा होने की संभावना बढ़ गई है।