“मुख्यमंत्री पद किसी की निजी जागीर नहीं”: ममता बनर्जी पर दिलीप घोष का तीखा हमला

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के खड़गपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विजयी प्रत्याशी दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री पद को लेकर ममता बनर्जी के रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी राजनीतिक पद स्थायी नहीं होता और इसे व्यक्तिगत संपत्ति की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

बुधवार सुबह न्यूटाउन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिलीप घोष ने कहा, “राजनीति में पद अस्थायी होते हैं। हर किसी को एक दिन यह पद छोड़ना पड़ता है, इसलिए किसी को भी भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि यह कुर्सी उसकी पैतृक संपत्ति है।”

उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों में राज्य को अपेक्षित विकास नहीं मिला। घोष के मुताबिक, इस दौरान बंगाल में हिंसा और भ्रष्टाचार के मामले बढ़े, जिससे आम लोगों का जीवन प्रभावित हुआ।

घोष ने एक चर्चित आपराधिक घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पीड़िता को न्याय दिलाने में सरकार विफल रही और उसके परिवार के साथ भी असम्मानजनक व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि जनता इन घटनाओं को भूली नहीं है और इसका असर चुनाव परिणामों में दिखाई दिया है।

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में ममता बनर्जी के बयानों से अधिक महत्व इस बात का है कि विपक्ष क्या मुद्दे उठा रहा है और जनता के सामने क्या विकल्प प्रस्तुत कर रहा है।

इसी बीच, भाजपा के वरिष्ठ नेता और नवनिर्वाचित विधायक सुवेंदु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने का आधार जनता का विश्वास होता है। “हम लोगों के साथ खड़े रहे, इसलिए हमें सफलता मिली। हमने पहले ही कहा था कि तृणमूल कांग्रेस को बड़ा नुकसान होगा,” उन्होंने कहा।

शिशिर अधिकारी ने ममता बनर्जी पर सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक परियोजनाओं में सरकारी धन का इस्तेमाल किया गया।