चीन की कोरोना वैक्‍सीन आयी दुनिया के सामने

:: न्‍यूज मेल डेस्‍क ::

पेइचिंग: चीन ने दुनिया के सामने अपनी पहली कोरोना वायरस वैक्सीन को पेश किया है। इस वैक्सीन को चीन की सिनोवेक बायोटेक और सिनोफॉर्म ने मिलकर तैयार किया है। हालांकि, इस वैक्सीन को अभी बाजार में जारी नहीं किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीनी वैक्सीन के तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल अभी जारी है। इस वैक्सीन के सभी ट्रायल्स सफलतापूर्वक खत्म होने के बाद इसे बाजार में जारी कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि यह वैक्सीन बाजार में 2020 के आखिरी में ही उपलब्ध होगी।

वैक्सीन के उत्पादन के लिए फैक्टरी तैयार
सिनोवेक कंपनी के अधिकारी ने बताया कि उसकी फर्म ने पहले ही वैक्सीन को बनाने के लिए एक फैक्ट्री को तैयार कर लिया है। यह फैक्ट्री हर साल वैक्सीन की 300 मिलियन डोज बनाने में सक्षम है। सोमवार को चीन ने वैक्सीन को पेइचिंग ट्रेड फेयर में प्रदर्शित किया, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ पहुंची थी।

दुनिया के 10 वैक्सीन ट्रायल के अंतिम चरण में
जिस कोरोना वायरस वैक्सीन को चीन ने प्रदर्शित किया है, वह दुनिया के उन 10 वैक्सीनों में शामिल है जो अपने क्लिनिकल ट्रायल के आखिरी चरण में हैं। इस समय सभी देश कोरोना वायरस के संक्रमण से उबरने और अपनी आर्थिक हालात को सुधारने में जुटे हुए हैं। जैसे ही किसी भी वैक्सीन के सफल होने की पुष्टि होती है उसे आधिकारिक मान्यता दे दी जाएगी।

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कोरोना फैलाने के कारण आलोचना झेल रहा चीन
कोरोना वायरस से निपटने के लिए चीन की विश्व स्तर पर आलोचना हो रही है। यही कारण है कि वह कोरोना वायरस वैक्सीन के विकास को लेकर इतनी तेजी दिखा रहा है। हालांकि उसपर इस संक्रमण को दुनियाभर में फैलाने का भी आरोप लग चुका है। ऐसी भी खबरें आई थी कि चीन ने कुछ लोगों को फाइनल ट्रायल के पहले ही वैक्सीन की डोज दे दी थी।

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ट्रायल के पहले चीन ने चुनिंदा लोगों को लगाई वैक्सीन
दुनियाभर में कोरोना वायरस फैलाने वाले चीन ने एक महीने पहले ही अपने लोगों को वैक्सीन दे दी थी। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने शनिवार को खुलासा किया था कि वह 22 जुलाई से ही अपने लोगों को वैक्सीन की डोज दे रहा है। हालांकि, आयोग ने यह नहीं बताया कि चीन में क्लिनिकल ट्रायल के अंतिम फेज में पहुंची चार वैक्सीन में से किसे लोगों को दिया गया है। इतना ही नहीं, आयोग ने यह भी दावा किया कि लोगों पर इस वैक्सीन का कोई कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रवक्ता मार्गरेट हैरिस ने जिनेवा में कहा कि दुनिया भर में कोरोना वायरस के कई वैक्सीन एडवांस क्लिनिकल स्टेज में हैं। लेकिन, किसी भी वैक्सीन के लिए यह नहीं कहा जा सकता है कि वह पूरी तरह से प्रभावी हैं। उन्होंने कहा कि हम अगले साल के मध्य तक भी व्यापक वैक्सीनेशन की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। मार्गरेट ने आगे कहा कि फेज 3 के ट्रायल में अधिक समय लग रहा है क्योंकि हम देखना चाहते हैं कि वह वैक्सीन कोरोना के खिलाफ कितनी सुरक्षा मुहैया कराती है और उसका कोई साइड इफेक्ट तो नहीं है।

इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन के आपातकालीन मामलों के प्रमुख डॉक्टर माइकल रेयान ने कहा था कि हमें हर्ड इम्यूनिटी हासिल करने की उम्मीद में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक आबादी के रूप में, अभी हम उस स्थिति के कहीं आसपास भी नहीं हैं जो वायरस के प्रसार को रोकने के लिए जरूरी है। हर्ड इम्यूनिटी कोई समाधान नहीं है और न ही यह ऐसा कोई समाधान है जिसकी तरफ हमें देखना चाहिए। आज तक हुए अधिकतर अध्ययनों में यही बात सामने आई है कि केवल 10 से 20 प्रतिशत आबादी में ही संबंधित एंटीबॉडीज हैं, जो लोगों को हर्ड इम्यूनिटी पैदा करने में सहायक हो सकते हैं। लेकिन, इतनी कम एंटीबॉडीज की दर से हर्ड इम्यूनिटी को नहीं पाया जा सकता।

डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी सुरक्षित और प्रभावी साबित होने से पहले किसी भी कोविड-19 टीके के उपयोग की सिफारिश नहीं करेगी। हालांकि, चीन और रूस ने व्यापक प्रयोग के समाप्त होने से पहले ही अपने टीके का उपयोग करना शुरू कर दिया है। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस अदानोम गेब्रेयसुस ने कहा कि टीकों का प्रयोग दशकों से सफलतापूर्वक किया जा रहा है। उन्होंने चेचक और पोलियो के उन्मूलन में इनके योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मैं जनता को आश्वस्त करना चाहूंगा कि डब्ल्यूएचओ एक ऐसे टीके का समर्थन नहीं करेगा जो प्रभावी और सुरक्षित नहीं है।

जॉर्जिया विश्वविद्यालय में वैक्सीन और इम्यूनोलॉजी के केंद्र के निदेशक टेड रॉस ने संभावना जताते हुए कहा कि हो सकता है कि कोरोना का सबसे पहला टीका उतना प्रभावी न हो। टेड रॉस भी कोरोना वायरस की एक वैक्सीन पर काम कर रहे हैं जो 2021 में क्लिनिकल ट्रायल के स्टेज में जाएगी। कुछ अन्य रिसर्चर्स ने भी दावा किया है कि हम एक ही रणनीति पर बहुत अधिक उम्मीदें लगाकर न बैठें। दुनियाभर के लैब्स में 88 वैक्सीन प्री क्लिनिकल ट्रायल के स्टेज में हैं। इनमें से 67 वैक्सीन निर्माता साल 2021 के अंत में पहला क्लिनिकल ट्रायल शुरू करेंगे।

रूस ने पहले ही अपनी कोरोना वैक्सीन Sputnik V को लॉन्च कर दिया है। हालांकि, उसे लेकर एक्सपर्ट्स को शक है क्योंकि बिना बड़ी आबादी पर टेस्ट किए ही, उसे अप्रूव कर दिया गया है। हालांकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया था कि इस वैक्सीन ने कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों पर अच्छा असर दिलाया है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उनकी एक बेटी को इस वैक्सीन का डोज दिया गया है।

दुनियाभर में कोरोना वायरस फैलाने वाले चीन ने एक महीने पहले ही अपने लोगों को वैक्सीन दे दी थी। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने शनिवार को खुलासा किया था कि वह 22 जुलाई से ही अपने लोगों को वैक्सीन की डोज दे रहा है। हालांकि, आयोग ने यह नहीं बताया कि चीन में क्लिनिकल ट्रायल के अंतिम फेज में पहुंची चार वैक्सीन में से किसे लोगों को दिया गया है। इतना ही नहीं, आयोग ने यह भी दावा किया कि लोगों पर इस वैक्सीन का कोई कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा है।

वुहान से कोरोना का दाग छुड़ाने में जुटा चीन
कोरोना वायरस की जन्मस्थली रहे वुहान शहर को लेकर चीन फिर प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश कर रहा है। चीन की सभी एजेंसिंया इस शहर को लेकर बनी नकारात्मक धारणाओं को तोड़ने के लिए जमकर प्रचार कर रही हैं। चीन की कोशिश है कि इस शहर से पैदा हुए वायरस को लेकर उसकी छवि को जो नुकसान पहुंचा है उसे कैसे भी ठीक किया जाए। चीन के विदेश मंत्री ने 28 अगस्त को यूरोप यात्रा के दौरान वुहान का गुणगान किया था।

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